पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 58 / 66
यशायाह 58
1“ऊंचे स्वर से पुकार, कुछ न रख छोड़। तुरही जैसी आवाज कर, और मेरे लोगों को उनका अपराध, हां, याकूब के घराने को उनके पाप जता दे।
2फिर भी वे प्रतिदिन मेरी खोज करते और मेरे मार्गों को जानने में ऐसे प्रसन्न होते हैं, जैसे वह प्रजा जिसने धार्मिकता दिखाई और अपने परमेश्वर के नियमों को न छोड़ा हो। वे मुझसे धार्मिकता के नियम पूछते हैं, वे परमेश्वर की उपस्थिति से प्रसन्न होते है।
3वे कहते हैं, ‘हमने क्यों उपवास किया जबकि तूने दृष्टि की ही नहीं? हमने अपने आपको कष्ट क्यों दिया जबकि तूने दृष्टि की ही नहीं? देखो, अपने उपवास के दिन तुम अपनी इच्छा पूरी करते हो, और अपने सेवकों को ही कष्ट देते हो।
4सुनो, तुम्हारा उपवास लड़ाई-झगड़े और दुष्टता से घूंसे मारने के लिए होता है। जैसा उपवास तुम आजकल रखते हो उससे तुम्हारी प्रार्थना ऊपर नहीं सुनाई देगी।
5जो उपवास मैं चाहता हूं क्या वह यही है अर्थात् ऐसा दिन जिसमें मनुष्य स्वयं को दीन करे? या अपना सिर सरकंडे के समान झुकाए? या बिछौने के लिए टाट और राख फैलाए? क्या तुम इसे उपवास अर्थात् यहोवा को प्रसन्न करने का दिन कहोगे?
6“जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं क्या वह यह नहीं कि दुष्टता की बेड़ियां तोड़ी जाएं, जुए के बन्धन काटे जाएं, सताए हुए स्वतंत्र किए जाएं, और प्रत्येक जूआ तोड़ डाला जाए?
7क्या वह यह नहीं कि तुम अपनी रोटी भूखों में बांटो, और बेघर कंगालों को घरों में ले आओ, किसी को नंगा देखकर उसे वस्त्र पहनाओ, और अपने आपको अपने जाति-भाइयों से न छिपाओ?
8“तब तेरा प्रकाश भोर के समान चमकेगा, और तू शीघ्र चंगा हो जाएगा। तेरी धार्मिकता तेरे आगे-आगे और यहोवा का तेज तेरे पीछे-पीछे चलेगा।
9तब तू पुकारेगा और यहोवा उत्तर देगा, तू दुहाई देगा और वह कहेगा, ‘मैं यहां हू।’ यदि तू अपने बीच से अंधेर करना, उंगली उठाना, और दुष्ट बातें बोलना दूर कर दे,
10और यदि तू भूखे को उदारता से दे तथा सताए हुओं के प्राणों को तृप्त करे तब अन्धकार में तेरा प्रकाश चमक उठेगा और तेरा अंधेरा दोपहर-का-सा उजियाला हो जाएगा।
11तब यहोवा निरन्तर तेरी अगुवाई करेगा और उजाड़ स्थानों में तुझे तृप्त करेगा और तेरी हड्डियों को बल प्रदान करेगा; और तू सींची हुई वाटिका और ऐसे सोते के समान हो जाएगा जिसका जल कभी नहीं सूखता।
12और तेरे वंश में के लोग पूर्वकाल में विध्वंस हुए खंडहरों का पुनः निर्माण करेंगे; तू पुरानी पीढ़ियों की नींव को पुनः स्थापित करेगा, और तुझे दरारों को भरने वाला, निवास के लिए मार्गों का सुधारने वाला कहा जाएगा।
13“यदि तू सब्त के कारण अपना पैर रोके रहे अर्थात् मेरे पवित्र दिन में अपनी इच्छा पूरी न करें, और सब्त को आनन्द का तथा यहोवा के पवित्र दिन को अादर योग्य दिन माने, और उसका सम्मान करे अर्थात् अपने मार्गों; में चलने, अपनी ही इच्छा पूरी करने, और अपनी ही बातें बोलने से रुका रहे,
14तब तू यहोवा में प्रसन्न रहेगा, और मैं तुझे पृथ्वी के ऊंचे-ऊंचे स्थानों पर ले चलूंगा; मैं तेरे मूलपुरुष याकूब के भाग में से तुझे खिलाऊंगा।” यहोवा ही के मुख से यह वचन निकला है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)