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यिर्मयाह 17:7

धन्य है वह मनुष्य जो यहोवा पर भरोसा रखता है और जिसका भरोसा यहोवा ही है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: यिर्मयाह 17

4तू स्वयं ही उस मीरास को जिसे मैंने तुझे दिया है अपने हाथों से जाने देगा, और मैं तुझसे उस देश में जिसे तू नहीं जानता तेरे अपने ही शत्रुओं की सेवा कराऊंगा; क्योंकि तूने मेरे क्रोध की अग्नि को ऐसे भड़काया है कि वह सदा जलती रहेगी।

5यहोवा यों कहता है, ”शापित है वह व्यक्ति जो मनुष्य पर भरोसा रखता और उसे अपना सहारा बनाता है और उसका हृदय यहोवा के विरफ़द्ध हो जाता है।

6वह मरफ़भूमि में उगी झाड़ी के समान होगा और सम्पन्नता को कभी न देखने पाएगा वह जंगल में पथरीली, उजाड़ और खारी भूमि पर बसेगा।

7धन्य है वह मनुष्य जो यहोवा पर भरोसा रखता है और जिसका भरोसा यहोवा ही है।

8क्योंकि वह उस वृक्ष के समान होगा जो नदी के किनारे लगाया गया हो और जिसकी जड़ें जल तक फैली हों; जब गर्मी पड़ेगी तो उसे कुछ भय न होगा, परन्तु उसके पत्ते हरे-भरे रहेंगे; और सूखे के वर्ष में भी उसे कुछ चिन्ता न होगी और वह निरन्तर फलता रहेगा।

9मन तो सब वस्तुओं से अधिक धोखेबाज होता है, और असाध्य रोग से ग्रस्त है; उसे कौन समझ सकता है?

10मैं यहोवा हृदय की खोजबीन करता हूं और मन को जांचता हूं कि प्रत्येक को उसके चाल-चलन के अनुसार और उसके कार्यों के फल के अनुसार बदला दू।

पूरा अध्याय पढ़ें: यिर्मयाह 17

संबंधित पद

  • यशायाह 26:3–4

    जिसका मन तुझमें लगा है, उसकी शान्ति तेरे द्वारा पूरी बनी रहेगी, क्योंकि उसका भरोसा तुझ पर है।

  • यशायाह 30:18

    फिर भी यहोवा तुम पर अनुग्रह करने के लिए ठहरा रहता है, और स्वर्ग में प्रतीक्षा करता है कि तुम पर दया करे क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे सब जो उसकी आस लगाए रहते है।

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