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मत्ती 6:24

कोई भी व्यक्ति दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह या तो एक से बैर और दूसरे से प्रेम करेगा, या एक से घनिष्टता रखेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा। तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: मत्ती 6

21क्योंकि जहां तेरा धन है वहां तेरा मन भी लगा रहेगा।

22देह का दीपक आंख है। इसलिए यदि तेरी आंख निर्मल है तो तेरी समस्त देह प्रकाशमान होगी।

23परन्तु यदि तेरी आंख बुरी हो तो तेरी समस्त देह अन्धकारमय होगी। इसलिए जो ज्योति तुझ में है यदि वही अन्धकार है तो यह अन्धकार कैसा घोर होगा!

24कोई भी व्यक्ति दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह या तो एक से बैर और दूसरे से प्रेम करेगा, या एक से घनिष्टता रखेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा। तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।

25इस कारण मैं तुमसे कहता हूँ कि अपने प्राण के लिए यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे या क्या पीएंगे; और न ही अपनी देह के लिए कि क्या पहनेंगे। क्या प्राण भोजन से या देह वस्त्र से बढ़कर नहीं?

26आकाश के पक्षियों को देखो कि वे न तो बोते हैं, न काटते हैं और न ही खलिहानों में इकट्ठा करते है, फिर भी तुम्हारा स्वर्गीय पिता उनको खिलाता है। क्या तुम्हारा मूल्य उनसे बढ़कर नहीं?

27तुम में से कौन है जो चिन्ता करके अपनी आयु एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?

पूरा अध्याय पढ़ें: मत्ती 6

संबंधित पद

  • 1 यूहन्ना 2:15–16

    संसार से प्रेम न करो, और न उन वस्तुओं से जो संसार में है। यदि कोई संसार से प्रेम करता है तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है।

  • लूका 16:13

    कोई भी सेवक दो स्वामियों की सेवा नहीं कर सकता; क्योंकि या तो वह एक से घृणा और दूसरे से प्रेम करेगा, या फिर एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्छ जानेगा। तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते।”

  • याकूब 4:4

    हे व्यभिचारिणियों, क्या तुम नहीं जानतीं कि संसार में मित्रता करना परमेश्वर से शत्रुता करनी है? अतः यदि कोई संसार से मित्रता रखना चाहता है तो वह अपने आप को परमेश्वर का शत्रु बनाता है।

  • 1 तीमुथियुस 6:9–10

    परन्तु जो धनवान होना चाहते है, वे प्रलोभन, फन्दे में, और अनेक मूर्खतापूर्ण और हानिकारक लालसाओं में पड़ जाते हैं जो मनुष्य को पतन तथा विनाश के गर्त में गिरा देती है।

  • यहोशू 24:15

    यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे तो आज ही चुन लो कि तुम किसकी सेवा करोगेः उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पूर्वज फरात नदी के उस पार करते थे, या एमोरियों के देवताओं की जिनके देश में तुम रहते हो। परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा ही की सेवा करूंगा।”

  • गलातियों 1:10

    क्या अब मैं मनुष्यों की कृपा प्राप्त करना चाहता हूं या परमेश्वर की? या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करने का प्रयास कर रहा हूं? यदि मैं अब तक मनुष्यों को प्रसन्न करने का प्रयत्न करता रहता तो मैं मसीह का दास न होता।

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