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मत्ती 6:34

इसलिए कल की चिन्ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा। आज के लिए आज ही का दुख बहुत है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: मत्ती 6

31इसलिए यह कहकर चिन्ता न करो, ‘हम क्या खाएंगे?’ अथवा ‘क्या पीएंगे?’ या, ‘हम क्या पहनेंगे?’

32क्योंकि गै़रयहूदी उत्सुकता से इन सब वस्तुओं की खोज में रहते हैं, पर तुम्हारा स्वर्गीय पिता जानता है कि तुम्हें इन सब वस्तुओं की आवश्यकता है।

33परन्तु तुम पहले परमेश्वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज में लगे रहो तो ये सब वस्तुएं तुम्हें दे दी जाएंगी।

34इसलिए कल की चिन्ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्ता आप कर लेगा। आज के लिए आज ही का दुख बहुत है।

पूरा अध्याय पढ़ें: मत्ती 6

संबंधित पद

  • मत्ती 6:25

    इस कारण मैं तुमसे कहता हूँ कि अपने प्राण के लिए यह चिन्ता न करना कि हम क्या खाएंगे या क्या पीएंगे; और न ही अपनी देह के लिए कि क्या पहनेंगे। क्या प्राण भोजन से या देह वस्त्र से बढ़कर नहीं?

  • यूहन्ना 14:27

    मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूँ; अपनी शान्ति तुम्हें देता हूँ; ऐसे नहीं देता जैसे संसार तुम्हें देता है। तुम्हारा मन व्याकुल न हो, और न भयभीत हो।

  • इब्रानियों 13:5–6

    तुम्हारा जीवन धन-लोलुपता से मुक्त हो। जो तुम्हारे पास है उसी में सन्तुष्ट रहो, क्योंकि उसने स्वयं कहा है, “मैं तुझे कभी न छोडूंगा और न ही कभी त्यागूंगा।”

  • यूहन्ना 16:33

    ये बातें मैंने तुमसे कही हैं कि तुम मुझमें शान्ति पाओ। संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु साहस रखो-मैंने संसार पर विजय पायी है।”

  • लूका 11:3

    हमें दिन भर की रोटी प्रतिदिन दिया कर।

  • विलापगीत 3:23

    प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान् है।

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).