मत्ती 7:1
“दोष न लगाओ जिससे तुम पर भी दोष न लगाया जाए।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: मत्ती 7
1“दोष न लगाओ जिससे तुम पर भी दोष न लगाया जाए।
2क्योंकि जिस प्रकार तुम दोष लगाते हो उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जाएगा। और जिस नाप से तुम नापते हो, उसी नाप से तुम्हारे लिए भी नापा जाएगा।
3तू क्यों अपने भाई की आंख के तिनके को देखता है और अपनी आंख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता?
4अथवा तू अपने भाई से कैसे कह सकता है, ‘ला, मैं तेरी आंख से तिनका निकाल दूं,’ जबकि देख, लट्ठा तो स्वयं तेरी आंख में है?
संबंधित पद
- लूका 6:37
किसी पर दोष मत लगाओ कि तुमपर भी दोष न लगाया जाए; किसी को दोषी मत ठहराओ कि तुम भी दोषी न ठहराए जाओ; क्षमा करो तो तुम भी क्षमा किए जाओगे।
- रोमियों 2:1–2
अतः हे दोष लगानेवाले, तू कोई क्यों न हो निरुत्तर है, क्योंकि जिस बात में तू दूसरों पर दोष लगाता है उसी बात में स्वयं को दोषी ठहराता है, क्योंकि तू जो दोष लगाता है, स्वयं भी वैसे ही कार्य करता है।
- याकूब 4:11–12
हे भाइयो, एक दूसरे के विरोध में न बोलो। जो अपने भाई के विरुद्ध बोलता या उस पर दोष लगाता है, वह व्यवस्था के विरुद्ध बोलता है और व्यवस्था पर दोष लगाता है। पर यदि तुम व्यवस्था पर दोष लगाते हो तो तुम उस पर चलने वाले नहीं वरन् उसके न्यायी ठहरे।
- लूका 6:41
तू अपने भाई की आंख के तिनके को क्यों देखता है? क्या तूझे अपनी आंख का लट्ठा नहीं सूझता?
- रोमियों 14:10–13
परन्तु तू अपने भाई पर क्यों दोष लगाता है? या तू फिर अपने भाई को क्यों तुच्छ जानता है? क्योंकि हम सब परमेश्वर के न्यायासन के सामने खड़े होंगे।
- मत्ती 7:5
हे पाखण्डी, पहले अपनी आंख का लट्ठा निकाल ले, तब अपने भाई की आंख का तिनका निकालने के लिए तू स्पष्ट देख सकेगा।
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