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पुराना नियम · नहेमायाह · अध्याय 8 / 13

नहेमायाह 8

1और जब सातवां महीना आया तो सब इस्राएली अपने-अपने नगर में थे। तब सब लोग एक मन होकर उस चौक में इकट्ठे हुए जो जल-फाटक के सामने है, और उन्होंने एज्रा शास्त्री से मूसा की व्यवस्था की पुस्तक को, जो यहोवा ने इस्राएल को दी थी, लाने को कहा।

2तब एज्रा याजक सातवें महीने के पहले दिन क्या स्त्री क्या पुरुष, जितने सुनकर समझ सकते थे, उनकी सभा के सामने व्यवस्था की पुस्तक ले आया।

3और वह व्यवस्था में से भोर से लेकर दोपहर तक उस चौक के सामने जो जल-फाटक के सामने था क्या स्त्री क्या पुरुष और सब समझने वालों को पढ़कर सुनाता रहा, और सब लोग व्यवस्था की पुस्तक पर कान लगाए रहे।

4तब एज्रा शास्त्री लकड़ी के मंच पर जो इसी उद्देश्य से बना था, खड़ा हो गया। और उसकी दाहिनी और मत्तित्याह, शेमा, अनायाह, ऊरिय्याह, हिल्किय्याह और मासेयाह, तथा बाईं ओर पदायाह, मीशाएल, मल्कियाह, हाशूम, हश्बद्दाना, जकर्याह, और मशुल्लाम खड़े हुए।

5एज्रा सबसे ऊंचे स्थान पर खड़ा था। उसने सब लोगों के देखते हुए पुस्तक को खोला। और जब उसने उसे खोला, तब सब लोग खड़े हो गए।

6तब एज्रा ने महान् परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा, और सब लोगों ने हाथ ऊपर उठाकर आमीन, आमीन कहा। तब उन्होंने सिर झुकाया और भूमि पर मुंह के बल गिरकर यहोवा को दण्डवत् किया।

7और येशू, बानी, शेरेब्याह, यामीन, अक्कूब, शब्बतै, होदिय्याह, मासेयाह, कलीता, अजर्याह, योजाबाद, हानान, और पलायाह नामक लेवी, लोगों को व्यवस्था समझाते गए, और लोग अपने अपने स्थान पर खड़े रहे।

8और उन्होंने पुस्तक अर्थात् परमेश्वर की व्यवस्था से अर्थ समझाते हुए पढ़ा जिससे लोग पढ़ी हुई बातों को समझ गए।

9तब नहेमायाह जो राज्यपाल था, और एज्रा जो याजक और शास्त्री था और लेवी जो लोगों को समझा रहे थे, उन्होंने सब लोगों से कहा, “आज का दिन तुम्हारे यहोवा परमेश्वर के लिए पवित्र है, इसलिए न तो विलाप करो और न रोओ।” क्योंकि सब लोग व्यवस्था के वचन सुनकर रो रहे थे।

10तब उसने उनसे कहा, “जाओ, चिकना भोजन करो, मीठा-मीठा रस पियो, और जिसने कुछ नहीं तैयार किया उसके पास हिस्सा भेजो, क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिए पवित्र है, शोकित मत हो, क्योंकि यहोवा में आनन्दित रहना ही तुम्हारा सामर्थ्य है।”

11अतः लेवियों ने यह कहकर सब लोगों को शान्त किया, “चुप रहो क्योंकि आज का दिन पवित्र है, और शोकित मत हो।”

12तब सब लोग खाने, पीने, हिस्सा भेजने और महान् उत्सव मनाने चले गए, क्योंकि जो बातें उन्हें बताई गईं थीं, उन्हें वे समझ गए थे।

13तब दूसरे दिन समस्त प्रजा के पूर्वजों के घरानों के मुख्य पुरुष तथा याजक और लेवी लोग एज्रा शास्त्री के पास एकत्रित हुए कि व्यवस्था के वचनों को समझे।

14और उन्हें व्यवस्था में यह लिखा हुआ मिला कि यहोवा ने मूसा के द्वारा आज्ञा दी थी कि इस्राएली सातवें महीने के पर्व के समय झोपड़ियों में रहा करे।

15इसलिए उन्होंने यह घोषणा की और अपने सब नगरों और यरूशलेम में यह सूचना दी, “पहाड़ पर जाओ और जैतून, तेलवृक्ष, मेंहदी, खजूर और अन्य घने वृक्षों की डालियां ले आकर झोपड़ियां बनाओ, जैसा कि लिखा है।”

16तब लोग जाकर डालियां ले आए और उन्होंने अपने-अपने घर की छत पर, आंगनों में, परमेश्वर के भवन के आंगनों में, जल-फाटक के चौक में, और एप्रैम के फाटक के चौक में अपने लिए झोपड़ियां बनाईं

17और बन्धुवाई से लौटकर आए हुए लोगों की समस्त मंडली झोपड़ियां बनाकर उनमें रही। वास्तव में नून के पुत्र यहोशू के दिनों से लेकर उस दिन तक इस्राएलियों ने ऐसा नहीं किया था। और उन्होंने बड़ा आनन्द मनाया।

18फिर उसने पहले दिन से लेकर अन्तिम दिन तक, प्रतिदिन परमेश्वर की व्यवस्था की पुस्तक में से पढ़कर सुनाया। और उन्होंने सात दिन तक पर्व मनाया और आठवें दिन नियम के अनुसार विशेष सभा हुई।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)