फिलिप्पियों 4:7
तब परमेश्वर की शान्ति, जो समझ से परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: फिलिप्पियों 4
4प्रभु में सदा आनन्दित रहो, मैं फिर कहता हूं आनन्दित रहो।
5तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रकट हो। प्रभु निकट है।
6किसी भी बात की चिन्ता न करो, परन्तु प्रत्येक बात में प्रार्थना और निवेदन के द्वारा तुम्हारी विनती धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख प्रस्तुत की जाए।
7तब परमेश्वर की शान्ति, जो समझ से परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी।
8अतः हे भाइयो, जो-जो बातें सत्य हैं, जो-जो बातें आदरणीय हैं, जो-जो बातें न्यायसंगत हैं, जो-जो बातें पवित्र हैं, जो-जो बातें मनोहर हैं, जो-जो बातें मनभावनी हैं, अर्थात् जो-जो उत्तम तथा प्रशंसनीय गुण हैं, उन्हीं का ध्यान किया करो।
9जो कुछ तुमने मुझ से सीखा, ग्रहण किया, सुना और मुझ में देखा है, उन्हीं का अनुकरण करो और परमेश्वर जो शान्ति का स्रोत है तुम्हारे साथ रहेगा।
10मैं प्रभु मैं बहुत आनन्दित हूं कि इतने दिनों पश्चात् मेरे प्रति तुम्हारी चिन्ता पुनः जागृत हुई। निःसन्देह, पहिले भी तुम्हें मेरी चिन्ता तो थी, परन्तु उसे प्रकट करने का अवसर नहीं मिला।
संबंधित पद
- यूहन्ना 14:27
मैं तुम्हें शान्ति दिए जाता हूँ; अपनी शान्ति तुम्हें देता हूँ; ऐसे नहीं देता जैसे संसार तुम्हें देता है। तुम्हारा मन व्याकुल न हो, और न भयभीत हो।
- यशायाह 26:3
जिसका मन तुझमें लगा है, उसकी शान्ति तेरे द्वारा पूरी बनी रहेगी, क्योंकि उसका भरोसा तुझ पर है।
- 2 थिस्सलुनीकियों 3:16
अब शान्ति का प्रभु स्वयं ही तुम्हें हर एक परिस्थिति में सर्वदा -शान्ति देता रहे। प्रभु तुम सब के साथ रहे।
- कुलुस्सियों 3:15
मसीह की शान्ति तुम्हारे हृदयों में राज्य करे जिसके लिए वास्तव में तुम एक देह में बुलाए गए; और धन्यवादी बने रहो।
- यूहन्ना 16:33
ये बातें मैंने तुमसे कही हैं कि तुम मुझमें शान्ति पाओ। संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु साहस रखो-मैंने संसार पर विजय पायी है।”
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