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नीतिवचन 19:21

मनुष्य के हृदय में तो अनेक योजनाएं रहती हैं, परन्तु यहोवा की युक्ति स्थिर रहती है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: नीतिवचन 19

18जब तक आशा है अपने पुत्र की ताड़ना कर, और उसकी मृत्यु की कामना न कर।

19अति क्रोधी मनुष्य अवश्य दण्ड भोगेगा, यदि तू उसे बचाए, तो उसे बार-बार बचाना पड़ेगा।

20सम्मति पर ध्यान दे और शिक्षा को ग्रहण कर, कि तू अपने अन्त काल में बुद्धिमान बना रहे।

21मनुष्य के हृदय में तो अनेक योजनाएं रहती हैं, परन्तु यहोवा की युक्ति स्थिर रहती है।

22मनुष्य में जो बात शोभनीय है, वह उसकी दयालुता है, और झूठा होने की अपेक्षा निर्धन होना उत्तम है।

23यहोवा का भय जीवन बढ़ाता है, कि मनुष्य विपत्ति से बचकर चैन से सो सके।

24आलसी मनुष्य भोजन की थाली में हाथ डालता है, परन्तु उसे मुंह तक नहीं ला पाता।

पूरा अध्याय पढ़ें: नीतिवचन 19

संबंधित पद

  • नीतिवचन 16:9

    मनुष्य अपने हृदय में युक्तियां बनाता है, परन्तु यहोवा ही उसके पग को निश्चित करता है।

  • यशायाह 14:24

    सेनाओं के यहोवा ने यह शपथ खाई है, “निःसंदेह जैसा मैंने ठाना है, वैसा ही हो जाएगा और जैसी योजना मैंने बनाई है, वैसी ही वह पूरी हो जाएगी,

  • नीतिवचन 16:1

    मनुष्य अपने हृदय में युक्तियां बनाता है, परन्तु उनका सफल होना यहोवा की ओर से होता है।

  • यशायाह 46:10

    मैं अन्त की बात आदि से और जो बातें अब तक नहीं हुईं उन्हें प्राचीनकाल से बताता आया हू। मैं कहता हूं कि मेरी योजना स्थिर रहेगी और मैं अपनी भली इच्छा पूरी करूंगा।

  • नीतिवचन 21:30

    ऐसी कोई बुद्धि, कोई समझ और कोई सम्मति नहीं जो यहोवा के विरुद्ध ठहर सके।

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).