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नीतिवचन 31:25

शक्ति और सम्मान उसका पहनावा है, और वह आने वाले दिनों पर हँसती है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: नीतिवचन 31

22वह स्वयं चादरें बुनती है। उसके वस्त्र महीन मलमल के और बैंजनी रंग के होते है।

23नगर के प्रवेश-द्वार की सभा में, जब उसका पति देश के प्राचीनों के साथ बैठता है तो सम्मान पाता है।

24वह मलमल के वस्त्र बनाकर बेचती है, और व्यापारियों तक कमरबन्ध पहुंचाती है।

25शक्ति और सम्मान उसका पहनावा है, और वह आने वाले दिनों पर हँसती है।

26वह बुद्धिमानी से मुंह खोलती है, और कोमल शिक्षा उसकी जीभ पर रहती है।

27वह अपनी गृहस्थी के सब मामलों पर ध्यान रखती, और परिश्रम किये बिना रोटी नहीं खाती।

28उसके बच्चे उठकर उसे धन्य कहते है। उसका पति भी यह कह कर उसकी प्रशंसा करता हैः

पूरा अध्याय पढ़ें: नीतिवचन 31

संबंधित पद

  • अय्यूब 40:10

    “अपने को महिमा और प्रताप से संवार; तथा अपने को ऐश्वर्य और तेज से सुशोभित कर।

  • रोमियों 13:14

    वरन् प्रभु यीशु मसीह को धारण कर लो और शारीरिक वासनाओं की तृप्ति में मन न लगाओ।

  • 1 तीमुथियुस 2:10

    वरन् अपने को भले कार्यों से संवारें जैसा कि उन स्त्रियों को शोभा देता है जो अपने आप को भक्तिन कहती है।

  • इफिसियों 4:24

    और नए मनुष्यत्व को पहिन लो जो परमेश्वर के अनुरूप सत्य की धार्मिकता और पवित्रता में सृजा गया है।

  • यशायाह 61:10

    मैं यहोवा के कारण अति आनन्दित होऊंगा, मेरा प्राण मेरे परमेश्वर में प्रफुल्लित होगा, क्योंकि उसने मुझे उद्धार के वस्त्र पहनाए हैं, उसने मुझे धार्मिकता के वस्त्र से ऐसे संवारा है, जैसे दूल्हा अपने आपको माला से सजाता और दुल्हन गहनों से अपना श्रृंगार करती है।

  • अय्यूब 29:14

    मैंने धार्मिकता को पहन लिया, और वह मेरा वस्त्र बनी; मेरा न्याय बागे और पगड़ी के समान था।

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).