भजन संहिता 33:12
क्या ही धन्य है वह प्रजा जिसका परमेश्वर यहोवा है, वह जाति जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिए चुना है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: भजन संहिता 33
9क्योंकि वह बोला, और हो गया; उसने आज्ञा दी, और ठीक वैसा ही हो गया।
10यहोवा जाति-जाति की युक्ति को निष्फल कर देता है; वह देश-देश के लोगों की योजनाओं को व्यर्थ कर देता है।
11यहोवा की युक्ति सर्वदा स्थिर रहती है, उसके हृदय की योजनाएं पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।
12क्या ही धन्य है वह प्रजा जिसका परमेश्वर यहोवा है, वह जाति जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिए चुना है।
13यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को देखता है।
14अपने निवासस्थान से वह पृथ्वी के सब निवासियों को निहारता है,
15वही जो उन सबके हृदयों को गढ़ता और उनके सारे कार्यों को समझता है।
संबंधित पद
- 1 पतरस 2:9
परन्तु तुम एक चुना हुआ वंश, राजकीय याजकाें का समाज, एक पवित्र प्रजा, और परमेश्वर की निज सम्पत्ति हो, जिस से तुम उसके महान् गुणों को प्रकट करो जिसने तुम्हें अंधकार से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है।
- यूहन्ना 15:16
तुमने मुझे नहीं चुना, परन्तु मैंने तुम्हे चुना और तुम्हें नियुक्त किया कि तुम फल लाओ और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से माँगो वह तुम्हें दे।
- व्यवस्थाविवरण 7:6–8
“तू अपने परमेश्वर यहोवा के लिए पवित्र प्रजा है; तेरे परमेश्वर यहोवा ने तुझे निज प्रजा होने के लिए पृथ्वी भर की सब जातियों में से चुना है।
- व्यवस्थाविवरण 33:29
हे इस्राएल, तू धन्य है। हे यहोवा से उद्धार पाई हुई प्रजा, तेरे तुल्य कौन है? वह तो तेरी सहायता के लिए ढाल, तथा तेरे प्रताप की तलवार है! अतः तेरे शत्रु तुझे सराहेंगे और तू उनके ऊँचे स्थानों को रौंदेगा।”
- इफिसियों 1:4
उसने हमें जगत की उत्पत्ति से पूर्व मसीह में चुन लिया कि हम उसके समक्ष प्रेम में पवित्र और निर्दोष हो।
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