पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 34 / 150
भजन संहिता 34
1मैं यहोवा को हर समय धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुंह से होती रहेगी।
2मेरा प्राण यहोवा पर गर्व करेगा; जो नम्र हैं वे इसे सुनकर आनन्दित होंगे।
3आओ, मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, हम सब मिलकर उसके नाम की स्तुति करे।
4मैंने यहोवा से मांगा और उसने मुझे उत्तर दिया और मेरे सब भय से मुझे छुटकारा दिया।
5जिन्होंने उसकी ओर देखा उन्होंने ज्योति पाई, और उनका मुंह कभी काला न होगा।
6इस दुखी जन ने पुकारा और यहोवा ने उसकी सुन ली और उसे उसके सारे कष्टों से छुड़ा लिया।
7यहोवा का भय मानने वालों के चारों और उसका दूत छावनी डालकर उन्हें बचाता है।
8परख कर देखो कि यहोवा कैसा भला हैः क्या ही धन्य है वह मनुष्य जो उसकी शरण लेता है।
9हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसका भय मानने वालों को किसी बात की घटी नहीं होती।
10जवान सिंहों को तो घटी होती है, और वे भूखे भी रह जाते हैं, परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होगी।
11हे बालको, आओ, मेरी सुनोः मैं तुम्हें यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।
12वह कौन है जो जीवन की अभिलाषा रखता है और दीर्घायु चाहता है कि भलाई देख सके?
13अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें बोलने से रोक रख।
14बुराई से दूर रह, और भलाई कर; शान्ति को ढूंढ़, और उसका पीछा कर।
15यहोवा की आंखें धर्मियों पर, लगी रहती हैं और उसके कान उनकी पुकार पर लगे रहते है।
16यहोवा दुष्कर्मियों के विमुख रहता है, कि उनका स्मरण भी पृथ्वी पर से मिटा डाले।
17धर्मी पुकारते हैं और यहोवा सुनता है, और उन्हें उनकी सारी विपत्तियों से छुड़ाता है।
18यहोवा टूटे मन वालों के निकट रहता है, और पश्चात्तापी आत्मा का उद्धार करता है।
19धर्मी पर बहुत-सी विपत्तियां आती तो हैं, परन्तु यहोवा उसको उन सबसे छुड़ाता है।
20वह उसकी हड्डी-हड्डी की रक्षा करता है, और उनमें से एक भी टूटने नहीं पाती।
21दुष्टता ही दुष्ट को मार डालेगी और धर्मी के बैरी दोषी ठहरेंगे।
22यहोवा अपने दासों का प्राण मोल लेकर छुड़ाता है, और उसकी शरण लेने वालों में से कोई भी दोषी न ठहरेगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)