पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 55 / 150
भजन संहिता 55
1हे परमेश्वर, मेरी प्रार्थना पर कान लगा, और मेरी गिड़गिड़ाहट से मुंह न मोड़।
2मेरी ओर ध्यान देकर मुझे उत्तर दे; अपने मन की व्यथा के कारण मैं बेचैन हूं, और निश्चय व्याकुल हूं-
3शत्रु के कोलाहल के कारण, दुष्ट के दबाव के कारण, क्योंकि वे मुझ पर मुसीबत ढाते हैं और क्रोध में मुझे सताते है।
4मेरा हृदय भीतर ही भीतर वेदना से भर गया है, और मृत्यु का भय मुझमें समा गया है।
5भय और कम्पन मुझ पर छा गए हैं, और थरथराहट ने मुझे धर दबोचा है।
6तब मैंने कहा, “भला होता कि कबूतर के समान मेरे भी पर होते, तो मैं उड़ जाता और चैन पाता।
7देखो, फिर तो मैं उड़ते-उड़ते दूर निकल जाता, और जंगल में बसेरा करता। सेला।
8मैं आंधी के झोंकों और तूफान से बचकर अपने शरणस्थान में भाग जाता।”
9हे प्रभु, उनका सर्वनाश कर दे, और उनकी भाषा में गड़बड़ी डाल, क्याेंकि मैंने नगर में हिंसा और झगड़ा देखा है।
10दिन-रात वे उसकी शहरपनाह पर चढ़कर चारों ओर घूमते रहते हैं, और उसके मध्य दुष्टता और उत्पात है।
11उसके मध्य विनाश है, उसकी गलियों से अत्याचार और छल कभी दूर नहीं होते।
12क्योंकि जो मेरी बदनामी करता है वह मेरा शत्रु नहीं, अन्यथा मैं सह लेता, न वह मेरा बैरी है जो मेरे विरुद्ध डींग मारता है, अन्यथा मैं अपने आपको उससे छिपा लेता।
13परन्तु वह तो तू ही है, मेरी बराबरी का मनुष्य मेरा साथी और मेरा परम मित्र।
14हमारी आपस की संगति मधुर थी, हम भीड़ के साथ परमेश्वर के भवन में जाते थे।
15उनको मृत्यु अचानक आ दबाएः वे जीते जी अधोलोक में उतर जाएं, क्योंकि उनके घर और उनके मध्य दुष्टता भरी है।
16परन्तु मैं तो परमेश्वर को पुकारूंगा, और यहोवा मुझे बचा लेगा।
17मैं तो सांझ को, भोर को, और दोपहर को गिड़गिड़ाकर विनती करूंगा और वह मेरी आवाज सुन लेगा।
18मेरे विरुद्ध छिड़े हुए युद्ध से वह मेरे प्राण को सकुशल छुड़ा लेगा, क्याेंकि मुझसे लड़ने वाले तो बहुत है।
19परमेश्वर जो प्राचीनकाल से सिंहासन पर विराजमान है, सुनेगा और उनको उत्तर देगा- सेला। अर्थात् उन्हें जिनमें कोई परिवर्तन नहीं होता, न वे परमेश्वर का भय मानते है।
20जिनका उसके साथ मेल-मिलाप था, उन्हीं के विरुद्ध उसने हाथ उठाया है; उसने अपनी वाचा को तोड़ दिया है।
21उसके मुंह की बातें तो मक्खन से भी चिकनी थीं, परन्तु उसके हृदय में युद्ध भरा था। उसकी बातें तेल से भी अधिक नरम, पर नंगी तलवारें थी।
22अपना बोझ यहोवा पर डाल दे और वही तुझे सम्भालेगा, वह धर्मी को कभी टलने न देगा।
23परन्तु हे परमेश्वर, तू उन्हें विनाश के गड्हे में उतार डालेगा; हत्यारे और छली मनुष्य अपनी आधी आयु तक भी जीवित न रहेंगे, परन्तु मैं तो तुझ पर भरोसा रखे रहूंगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)