पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 56 / 150
भजन संहिता 56
1हे परमेश्वर, मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मनुष्य मुझे कुचलता है, और दिन भर मेरे साथ लड़-लड़कर मुझे सताता है।
2मेरे शत्रु दिन भर मुझे कुचलते रहते हैं, क्योंकि वे बहुत हैं जो अभिमान करके मुझसे लड़ते है।
3जब मुझे डर लगेगा, मैं अपना भरोसा तुझ पर रखूंगा।
4परमेश्वर जिसके वचन की मैं स्तुति-प्रशंसा करता हूं, उसी परमेश्वर पर मैंने भरोसा रखा हैः मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या बिगाड़ सकता है?
5वे दिन भर मेरे वचन को तोड़ते-मरोड़ते हैं; उनके सारे विचार मेरी हानि ही के लिए होते है।
6वे मेरे प्राण की घात में रहते हैं, वे मुझ पर आक्रमण करते हैं, मेरी ताक में रहते हैं, और मेरे कदमों की टोह लेते है।
7उनकी दुष्टता के कारण उन्हें खदेड़ दे; हे परमेश्वर, अपने क्रोध में देश-देश के लोगों का दमन कर।
8तूने मेरे मारे-मारे फिरने का हिसाब रखा है। मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले; क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है?
9तब तो जिस दिन मैं पुकारूं, मेरे शत्रु उलटे भागेंगे; मैं यह जानता हूं कि परमेश्वर मेरी ओर है।
10परमेश्वर पर जिसके वचन की मैं स्तुति प्रशंसा करता हूं, यहोवा, जिसके वचन की मैं स्तुति-प्रशंसा करता हूं-
11परमेश्वर पर ही मैंने अपना भरोसा रखा है; मैं न डरूंगा। मनुष्य मेरा क्या बिगाड़ सकता है?
12हे परमेश्वर, तेरी मन्नतों से मैं बंधा हूं; मैं तेरे लिए धन्यवाद की भेंट चढ़ाऊंगा।
13क्योंकि तूने मेरे प्राण को मृत्यु से छुड़ाया है, सचमुच, मेरे पैरों को ठोकर खाने से बचाया है, कि मैं परमेश्वर के सम्मुख जीवितों के प्रकाश में चलू।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)