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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 62 / 150

भजन संहिता 62

1मेरे प्राण को परमेश्वर ही की आस है, मेरा उद्धार उसी से है।

2वही मेरी चट्टान और मेरा उद्धार, हां, मेरा दृढ़-गढ़ है, मैं अधिक न डिगूंगा।

3तुम सब, घात करने के लिए एक व्यक्ति पर कब तक धावा करते रहोगे जो किसी झुकी दीवार या गिरते हुए बाड़े के समान है?

4उन्होंने तो उसे ऊंचे पद से गिराने की ही सम्मति की है; वे झूठ से प्रसन्न रहते हैं; मुंह से तो वे आशीर्वाद देते, पर मन ही मन शाप देते है। सेला।

5हे मेरे प्राण, परमेश्वर ही की आस रख, क्योंकि मेरी आशा उसी से है।

6वही मेरी चट्टान और मेरा उद्धार, हां, मेरा दृढ़ गढ़ हैः मैं न डिगूंगा।

7मेरे उद्धार और मेरी महिमा का आधार परमेश्वर हैं, मेरी दृढ़ चट्टान और मेरा शरणस्थान परमेश्वर है।

8हे लोगों, हर समय उस पर भरोसा रखो; अपने हृदय उसके सामने उंडेल दो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।

9नीच लोग श्वासमात्र, और बड़े लोग मिथ्या ही हैं; तुला में उनका पलड़ा ऊपर उठ जाता है, वे सबके सब श्वास से भी हल्के पड़ते है।

10अन्धेर करने पर भरोसा मत रखो, न लूट-मार करने पर व्यर्थ-आशा रखो; यदि धन-सम्पत्ति बढ़े फिर भी उस पर मन न लगाना।

11परमेश्वर ने एक बात कही, दो बातें मैंने सुनीं: कि ‘सामर्थ्य परमेश्वर ही का है’

12और ‘हे प्रभु, करुणा भी तेरी है।’ तू तो मनुष्य को उसके कार्यों के अनुसार फल देता है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)