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रोमियों 15:13

अब आशा का परमेश्वर तुम्हें विश्वास करने में सम्पूर्ण आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, जिससे पवित्र आत्मा के सामर्थ्य से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: रोमियों 15

10फिर वह कहता है, “हे गै़रयहूदियो, उसकी प्रजा के साथ आनन्द मनाओ।”

11और फिर कहता है, “हे समस्त गै़रयहूदियो, प्रभु की स्तुति करो; सब जातियां उसकी प्रशंसा करे।”

12फिर यशायाह कहता है, “यिशै का मूल प्रकट होगा और वह जो ग़ैरयहूदियों पर राज्य करने के लिए खड़ा होगा, उस पर गै़रयहूदी आशा रखेंगे।”

13अब आशा का परमेश्वर तुम्हें विश्वास करने में सम्पूर्ण आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, जिससे पवित्र आत्मा के सामर्थ्य से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।

14हे भाइयों, जहां तक तुम्हारा सम्बन्ध है, मैं स्वंय भी आशवस्त हूँ कि तुम स्वयं अच्छाई और समस्त ज्ञान से परिपूर्ण हो, और इस योग्य भी हो कि एक दूसरे को चेतावनी दे सको।

15परन्तु मैंने तुम्हें कुछ विषयों पर पुनः स्मरण दिलाने के लिए बड़े हियाव के साथ लिखा है। यह उस अनुग्रह के कारण हुआ जो परमेश्वर ने मुझे दिया था,

16कि मैं ग़ैरयहूदियों के लिए मसीह यीशु का सेवक बनूं और परमेश्वर के सुसमाचार की सेवा याजक के समान करूँ कि ग़ैरयहूदीरूपी मेरी भेंट पवित्र आत्मा से पवित्र की जाकर ग्रहण की जाए।

पूरा अध्याय पढ़ें: रोमियों 15

संबंधित पद

  • 2 थिस्सलुनीकियों 2:16–17

    अब स्वयं हमारा प्रभु यीशु मसीह तथा पिता परमेश्वर जिसने हमसे प्रेम किया और अनुग्रह से अनन्त शान्ति तथा उत्तम आशा दी है,

  • रोमियों 12:12

    आशा में आनन्दित रहो, क्लेश में स्थिर रहो, प्रार्थना में समर्पित रहो।

  • 2 कुरिन्थियों 9:8

    और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है, जिससे कि तुम सदैव, सब बातों में परिपूर्ण रहो, और हर भले कार्य के लिए तुम्हारे पास भरपूरी से हो।

  • गलातियों 5:22

    परन्तु पवित्र आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, दयालुता, भलाई, विशवस्तता,

  • रोमियों 14:17

    क्योंकि परमेश्वर का राज्य खाना-पीना नहीं, परन्तु धार्मिकता, मेल और वह आनन्द है जो पवित्र आत्मा में है।

  • यूहन्ना 14:1

    “तुम्हारा हृदय व्याकुल न हो। तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो, मुझ पर भी विश्वास रखो।

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).