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पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 12 / 50

उत्पत्ति 12

1तब यहोवा ने अब्राम से कहा, “अपने देश, अपने कुटुम्बियों तथा अपने पिता के घर से उस देश को चला जा, जो मैं तुझे दिखाऊंगा।

2मैं तुझे एक बड़ी जाति बनाऊंगा, और मैं तुझे आशीष दूंगा और तेरा नाम महान् करूंगा; इसलिए तू आशीष का कारण होगा;

3जो तुझे आशीर्वाद देंगे, मैं उन्हें आशीष दूंगा, तथा जो तुझे शाप दे, मैं उसे शाप दूंगा, और पृथ्वी के सब घराने तुझमें आशीष पाएंगे।”

4यहोवा के इस वचन के अनुसार अब्राम चल पड़ा और लूत भी उसके साथ गया। अब्राम तो पचहत्तर वर्ष का था और उसने हारान से कूच किया।

5अब्राम अपनी पत्नी सारै, अपने भतीजे लूत, अपनी सारी धन-सम्पत्ति जो उन्होंने इकट्ठी की थी, और उन लोगों को जो उसने हारान में प्राप्त किए थे, साथ लेकर कनान देश के लिए चल पड़ा। इस प्रकार वे कनान देश में आ गए।

6अब्राम उस देश में से होकर शकेम में उस स्थान तक पहुंचा जहां मोरे का बांजवृक्ष था। उस समय कनानी लोग उस देश में रहते थे।

7तब यहोवा ने अब्राम को दर्शन देकर कहा, “यह देश मैं तेरे वंश को दूंगा।” इसलिए उसने वहां यहोवा के लिए जिसने उसे दर्शन दिया था एक वेदी बनाई।

8तब वह वहां से आगे बढ़कर बेत-एल के पूर्व के पर्वत पर पहुंचा और वहीं अपना तम्बू खड़ा किया, जहां पश्चिम में बेत-एल और पूर्व में ऐ है। वहां उसने यहोवा के लिए एक वेदी बनाई और यहोवा से प्रार्थना की।

9और अब्राम वहां से यात्रा करते हुए नेगेव की ओर बढ़ता गया।

10उस समय देश में अकाल पड़ा हुआ था; इसलिए अब्राम मिस्र को चला गया कि कुछ समय परदेशी होकर रहे, क्योंकि देश में भीषण अकाल पड़ा था।

11फिर ऐसा हुआ कि जब वह मिस्र के निकट पहुंचा, तो उसने अपनी पत्नी सारै से कहा, “देख, मैं जानता हूं कि तू एक सुन्दर स्त्री है;

12और जब मिस्री तुझे देखेंगे तो कहेंगे, ‘यह उसकी पत्नी है,’ तब वे मुझे तो मार डालेंगे परन्तु तुझे जीवित रखेंगे।

13इसलिए कृपया यह कहना, ‘मैं उसकी बहन हूं,’ जिससे कि तेरे कारण मेरा भला हो ओर मैं तेरे कारण जीवित रह सकू।”

14फिर ऐसा हुआ कि जब अब्राम मिस्र में आया तो मिस्रियों ने देखा कि वह स्त्री अति सुन्दर है।

15फि़रौन के अधिकारियों ने उसको देखकर फि़रौन से उसकी प्रशंसा की; और वह स्त्री फि़रौन के घर पहुंचाई गई।

16इसलिए फि़रौन ने उसके कारण अब्राम के साथ बहुत अच्छा व्यवहार किया; और उसे भेड़-बकरियां, गाय-बैल, गदहे-गदहियां, दास-दासियां और ऊंट दिए।

17परन्तु यहोवा ने फि़रौन और उसके परिवार पर अब्राम की पत्नी सारै के कारण, बड़ी विपत्तियां डाली।

18तब फि़रौन ने अब्राम को बुलाकर कहा, “तूने मेरे साथ यह क्या किया? यह तो तेरी पत्नी है। तूने मुझे क्यों नहीं बताया?

19तूने यह क्यों कहा, ‘वह मेरी बहन है,’ जिस कारण मैंने उसे अपनी पत्नी बनाने के लिए लिया? परन्तु अब देख, यह तेरी पत्नी है। इसे लेकर चला जा।”

20तब फि़रौन ने उसके विषय में अपने कर्मचारियों को आज्ञा दी; और उन्होंने उसको उसकी पत्नी और सारी सम्पत्ति सहित विदा कर दिया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)