नया नियम · इब्रानियों · अध्याय 12 / 13
इब्रानियों 12
1इस कारण जबकि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हमें घेरे हुए है, तो आओ, प्रत्येक बाधा और उलझाने वाले पाप को दूर करके वह दौड़ जिसमें हमें दौड़ना है धीरज से दौड़ें,
2और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर अपनी दृष्टि लगाए रहें, जिसने उस आनन्द के लिए जो उसके सामने रखा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न करके क्रूस का दुख सहा, और परमेश्वर के सिंहासन की दाहिनी ओर जा बैठा।
3इसलिए उस पर ध्यान करो जिसने पापियों का अपने विरोध में इतना विद्रोह सह लिया कि तुम थक कर निरुत्साहित न हो जाओ।
4पाप से लड़ते हुए तुमने ऐसा संघर्ष नहीं किया कि तुम्हारा लहू बहा हो,
5और तुम उस उपदेश को जो तुम्हें पुत्र मानकर दिया गया है, भूल गए होः “हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हल्की बात न समझ, और जब वह तुझे झिड़के तो हताश न हो।
6क्योंकि प्रभु जिस से प्रेम करता है उसकी ताड़ना भी करता है, और जिसे पुत्र बना लेता है, उसे कोड़े भी लगाता है।”
7तुम दुख को ताड़ना समझकर सह लो, क्योंकि परमेश्वर तुम्हें पुत्र जानकर तुम्हारे साथ व्यवहार करता है। वह कौन-सा पुत्र है जिसकी ताड़ना उसका पिता नहीं करता?
8पर यदि वह ताड़ना जो सब की होती है, तुम्हारी नहीं हुई तो तुम पुत्र नहीं, परन्तु व्यभिचार की सन्तान ठहरे।
9फिर यह कि जब शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना करते थे तो हमने उनका आदर किया, तब क्यों न आत्माओं के पिता के और भी अधिक अधीन रहें, जिससे कि हम जीवित रहें?
10क्योंकि उन्होंने थोड़े समय के लिए जैसा भी उन्हें उत्तम जान पड़ा हमारी ताड़ना की, परन्तु वह हमारे भले के लिए ताड़ना करता है, कि हम उसकी पवित्रता में सहभागी हो जाए।
11सब प्रकार की ताड़ना कुछ समय के लिए सुखदायी नहीं, परन्तु दुखदायी प्रतीत होती है, फिर भी जो इसके द्वारा प्रशिक्षित हो चुके हैं, उन्हें बाद में धार्मिकता का शान्तिदायक फल प्राप्त होता है।
12इसलिए शिथिल हाथों और निर्बल घुटनों को सबल बनाओ,
13और अपने पैरों के लिए सीधे मार्ग बनाओ, जिससे कि वह अंग जो लंगड़ा है जोड़ से न उखड़े वरन् चंगा हो जाए।
14सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो, और उस पवित्रता के खोजी बनो, जिसके बिना प्रभु को कोई भी नहीं देख पाएगा।
15ध्यान रखो कि कोई परमेश्वर के अनुग्रह से वंचित न रह जाए, या कोई कड़वी जड़ फूटकर कष्ट का कारण न बने, जिससे कि बहुत से लोग अशुद्ध हो जाए।
16तुम में से कोई भी व्यक्ति दुराचारी या एसाव के सदृश न हो जिसने एक बार के भोजन के लिए अपने पहिलौठेपन का अधिकार बेच डाला।
17तुम जानते हो कि इसके बाद जब उसने आशिज प्राप्त करनी चाही तो अयोग्य गिना गया और आंसू बहा बहाकर ढूंढ़ने पर भी उसे पश्चात्ताप करने का अवसर न मिला।
18क्योंकि तुम उस पर्वत के पास नहीं आए जिसे छुआ जा सके, और न प्रज्ज्वलित अग्नि, न अन्धकार, न काली घटा और न बवण्डर के पास,
19और न ही तुरही-नाद अथवा ऐसी किसी आवाज़ के पास आए जिसके सुनने वालों ने विनती की कि अब आगे को उन्हें ऐसा और कोई शब्द सुनाई न पड़े।
20क्योंकि वे उस आज्ञा को सह न सकेः “यदि कोई पशु भी पर्वत को छुए तो उसका पथराव किया जाए।”
21वह दृशय इतना भयंकर था कि मूसा ने कहा, “मैं अत्यन्त भयभीत हूं और कांपता हू।”
22परन्तु तुम तो सिय्योन पर्वत के और जीवित परमेश्वर के नगर, स्वर्गीय यरूशलेम में तथा असंख्य स्वर्गदूतों के पास,
23और महासभा अर्थात् उन पहिलौठों की कलीसिया के समीप जिनके नाम स्वर्ग में लिखे हैं, और सब के न्यायाधीश परमेश्वर और सिद्ध किए हुए धर्मियों की आत्माओं की उपस्थिति में,
24तथा नई वाचा के मध्यस्थ यीशु के, और छिड़काव के उस लहू के पास आए हो जो हाबिल के लहू की अपेक्षा उत्तम बातें कहता है।
25सावधान रहो और उस बोलने वाले का इनकार न करो, क्योंकि जब वे लोग पृथ्वी पर चेतावनी देने वाले की अनसुनी करके न बच सके तो स्वर्ग से चेतावनी देने वाले की अनसुनी कर के हम बिल्कुल न बच सकेंगे।
26उस समय उसकी वाणी ने पृथ्वी को हिला दिया, परन्तु अब उसने यह कहकर प्रतिज्ञा की है, “एक बार फिर मैं न केवल पृथ्वी को वरन् आकाश को भी हिला दूंगा।”
27और यह कथन, “एक बार फिर,” उन वस्तुओं के हटाए जाने की ओर संकेत करता है, जो सृजी हुई होने के कारण हिलाई जा सकती हैं, जिससे कि जो वस्तुएं हिलाई नहीं जा सकती हैं, वे बनी रहे।
28अतः जब हमें ऐसा राज्य मिलने पर है जो अटल है तो आओ, हम कृतज्ञ होकर आदर और भय सहित परमेश्वर की ऐसी उपसना करें जो उसे ग्रहणयोग्य हो,
29क्योंकि हमारा परमेश्वर भस्म करने वाली आग है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)