यशायाह 55:11
उसी प्रकार मेरे मुंह से निकलने वाला वचन होगा। वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, वरन् मेरी इच्छा पूरी करेगा और जिस काम के लिए मैंने उसको भेजा है उसे पूरा करके ही लौटेगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: यशायाह 55
8यहोवा कहता है, “मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं हैं, न ही तुम्हारे मार्ग और मेरे मार्ग एक जैसे है।
9क्योंकि मेरे और तुम्हारे मार्गों में और मेरे और तुम्हारे सोच-विचारों में आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।
10जिस प्रकार आकाश से वर्षा और हिम गिरते हैं और पृथ्वी को सींचे बिना वापस नहीं जाते और भूमि को उपजाऊ और फलदाई बनाते हैं जिससे बोने वाले को बीज और खाने वाले को रोटी मिलती है,
11उसी प्रकार मेरे मुंह से निकलने वाला वचन होगा। वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, वरन् मेरी इच्छा पूरी करेगा और जिस काम के लिए मैंने उसको भेजा है उसे पूरा करके ही लौटेगा।
12क्योंकि तुम आनन्द के साथ निकलोगे और शान्ति के साथ तुम्हारी अगुवाई की जाएगी। तुम्हारे आगे-आगे पर्वत और पहाड़ियां गला खोलकर जय-जयकार करेंगी, और मैदान के सब वृक्ष आनन्द के मारे ताली बजाएंगे।
13तब कँटीली झाड़ियों के स्थान पर सनौवर उगेंगे, बिच्छू-पौधों के स्थान पर मेंहदी उगेगी, और इस कार्य से यहोवा का नाम होगा। क्योंकि यह अनन्तकाल का एक चिह्न होगा जो कभी न मिटेगा।
संबंधित पद
- मत्ती 24:35
आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरे वचन कभी न टलेंगे।
- यशायाह 46:10
मैं अन्त की बात आदि से और जो बातें अब तक नहीं हुईं उन्हें प्राचीनकाल से बताता आया हू। मैं कहता हूं कि मेरी योजना स्थिर रहेगी और मैं अपनी भली इच्छा पूरी करूंगा।
- रोमियों 10:17
अतः विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन के द्वारा होता है।
- यूहन्ना 6:63
आत्मा ही है जो जीवन देता है, शरीर से कुछ लाभ नही। जो वचन मैंने तुमसे कहे हैं, वे आत्मा और जीवन है।
- यशायाह 45:23
मैंने अपनी ही शपथ खाई, मेरे मुख से धार्मिकता में ही यह वचन निकला है जो नहीं टलने काः प्रत्येक घुटना मेरे आगे टिकेगा और प्रत्येक जीभ मेरी ही निष्ठा की शपथ खाएगी।
- लूका 8:11–16
दृष्टान्त यह हैः बीज परमेश्वर का वचन है।
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