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याकूब 1:2

हे मेरे भाइयो, जब तुम विभिन्न परीक्षाओं का सामना करते हो तो इसे बड़े आनन्द की बात समझो,

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: याकूब 1

1परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह के दास याकूब का उन बारहों गोत्रों को नमस्कार पहुंचे जो तितर-बितर होकर रहते है।

2हे मेरे भाइयो, जब तुम विभिन्न परीक्षाओं का सामना करते हो तो इसे बड़े आनन्द की बात समझो,

3यह जानते हुए कि तुम्हारे विश्वास के परखे जाने से धीरज उत्पन्न होता है,

4पर धीरज को अपना पूरा कार्य करने दो कि तुम पूर्ण तथा सिद्ध हो जाओ, जिससे कि तुम में किसी बात की कमी न रहे।

5यदि तुम में से किसी को बुद्धि की कमी हो तो वह परमेश्वर से मांगे और उसे दी जाएगी, क्योंकि वह प्रत्येक को बिना उलाहना दिए उदारता से देता है।

पूरा अध्याय पढ़ें: याकूब 1

संबंधित पद

  • 1 पतरस 1:6–8

    इस से तुम अति आनन्दित होते हो, भले ही तुम्हें अभी कुछ समय के लिए विभिन्न परीक्षाओं के द्वारा दुख उठाना पड़ा हो

  • याकूब 1:12

    धन्य है वह मनुष्य जो परीक्षा में स्थिर रहता है, क्योंकि खरा निकल कर वह जीवन के उस मुकुट को प्राप्त करेगा जिसे प्रभु ने अपने प्रेेम रखने वालों को देने की प्रतिज्ञा की है।

  • 2 कुरिन्थियों 12:9–10

    और उसने मुझ से कहा, “मेरा अनुग्रह तेरे लिए पर्याप्त है, क्योंकि मेरा सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होता है।” अतः मैं सहर्ष अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूंगा। जिससे कि मसीह का सामर्थ्य मुझमें निवास करे।

  • मत्ती 5:10–12

    धन्य हैं वे जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है।

  • लूका 6:22–23

    धन्य हो तुम जब मनुष्य के पुत्र के कारण लोग तुमसे घृणा करें, तुम्हें बहिष्कृत करें, तुम्हारी अत्यन्त निन्दा करें और बुरा समझकर तुम्हारा नाम काट दे।

  • फिलिप्पियों 1:29

    क्योंकि मसीह के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि तुम उस पर केवल विश्वास ही न करो वरन् उसके लिए कष्ट भी सहो,

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).