याकूब 4:14
फिर भी यह नहीं जानते कि कल तुम्हारे जीवन का क्या होगा। तुम तो भाप के समान हो, जो थोड़ी देर तक दिखाई देती और फिर अदृशय हो जाती है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: याकूब 4
11हे भाइयो, एक दूसरे के विरोध में न बोलो। जो अपने भाई के विरुद्ध बोलता या उस पर दोष लगाता है, वह व्यवस्था के विरुद्ध बोलता है और व्यवस्था पर दोष लगाता है। पर यदि तुम व्यवस्था पर दोष लगाते हो तो तुम उस पर चलने वाले नहीं वरन् उसके न्यायी ठहरे।
12व्यवस्था का देने वाला और न्यायी तो एक ही है, जो बचाने अथवा नाश करने का सामर्थ्य रखता है। पर तुम कौन होते हो जो अपने पड़ोसी पर दोष लगाते हो?
13सुनो, तुम जो यह कहते हो, ‘आओ, हम आज या कल अमुक नगर में जाकर वहां एक वर्ष बिताएंगे और व्यापार करके लाभ उठाएंगे,
14फिर भी यह नहीं जानते कि कल तुम्हारे जीवन का क्या होगा। तुम तो भाप के समान हो, जो थोड़ी देर तक दिखाई देती और फिर अदृशय हो जाती है।
15पर इसके विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, ‘यदि प्रभु की इच्छा हो तो हम जीवित रहेंगे और यह अथवा वह काम भी करेंगे।
16पर अब तुम अपनी धृष्टता पर डींग मारते हो, और ऐसी डींगे मारना बुरा है।
17इसलिए जो कोई उचित काम करना जानता है और नहीं करता, उसके लिए यह पाप है।
संबंधित पद
- 1 पतरस 1:24
क्योंकि, “सब प्राणी घास के सदृश हैं, और उनकी सारी शोभा घास के फूल के सदृश है। घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है,
- 1 यूहन्ना 2:17
संसार तथा उसकी लालसाएं भी मिटती जा रही हैं, परन्तु वह जो परमेश्वर की इच्छा पूरी करता है सर्वदा बना रहेगा।
- अय्यूब 7:6–7
मेरे दिन जुलाहे की ढरकी से भी तीव्र हैं, और वे आशारहित व्यतीत हो जाते है।
- याकूब 1:10
और धनी अपनी हीन दशा पर, क्योंकि वह घास के फूल की भांति समाप्त हो जाएगा।
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