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मत्ती 1:21

वह पुत्र को जन्म देगी और तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: मत्ती 1

18अब मसीह का जन्म इस प्रकार हुआ कि जब उसकी माता मरियम की मंगनी यूसुफ के साथ हुई, तो उनके समागम से पूर्व ही वह पवित्र आत्मा की ओर से गर्भवती पाई गई।

19उसके पति यूसुफ ने धर्मी होने के कारण उसे बदनाम न करने की इच्छा से चुपचाप उसे त्याग देने का विचार किया।

20पर जब वह यह सब सोच रहा था तो प्रभु का एक स्वर्गदूत उसे स्वप्न में यह कहता दिखाई पड़ा, “हे यूसुफ, दाऊद के पुत्र, तू मरियम को अपनी पत्नी बनाने से मत डर, क्योंकि जो उसके गर्भ में है वह पवित्र आत्मा की ओर से है।

21वह पुत्र को जन्म देगी और तू उसका नाम यीशु रखना, क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा।”

22अब यह सब इसलिए हुआ कि प्रभु ने जो वचन नबी के द्वारा कहा था, वह पूरा होः

23“देखो, एक कुंवारी गर्भवती होगी, वह एक पुत्र को जन्म देगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा,” जिसका अर्थ है, ‘परमेश्वर हमारे साथ’।

24तब यूसुफ नींद से जाग उठा और परमेश्वर के स्वर्गदूत के आज्ञानुसार उसे ब्याहकर ले आया,

पूरा अध्याय पढ़ें: मत्ती 1

संबंधित पद

  • प्रेरितों के काम 13:23

    इसी मनुष्य के वंश से परमेश्वर ने प्रतिज्ञानुसार इस्रएल के पास एक उद्धारकर्ता अर्थात यीशु को भेजा,

  • प्रेरितों के काम 4:12

    किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं, क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया है जिसके द्वारा हम उद्धार पाए।

  • यूहन्ना 1:29

    दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, “देखो, परमेश्वर का मेमना जो जगत का पाप उठा ले जाता है।

  • 1 यूहन्ना 3:5

    तुम जानते हो कि वह इसलिए प्रकट हुआ कि पापों को हर ले जाए; और उसमें कोई भी पाप नही।

  • कुलुस्सियों 1:20–23

    और उसके क्रूस पर बहाए गए लहू के द्वारा शान्ति स्थापित कर के उसी के द्वारा समस्त वस्तुओं का अपने साथ मेल कर ले- चाहे वे पृथ्वी पर की हों अथवा स्वर्ग में की।

  • लूका 2:21

    आठ दिन पूर्ण होने पर जब बालक के ख़तने का समय आया तो उसका नाम यीशु रखा गया-अर्थात् वह नाम जो उसके गर्भ में आने से पूर्व स्वर्गदूत द्वारा दिया गया था।

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).