मत्ती 24:35
आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरे वचन कभी न टलेंगे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: मत्ती 24
32“अंजीर के वृक्ष से यह दृष्टान्त सीखेः जब उसकी डाल कोमल हो जाती और उसमें पत्तियां निकलने लगती हैं तो तुम जान लेते हो कि ग्रीज्म ट्ठतु निकट है।
33इसी प्रकार जब तुम इन सब बातों को होते देखो तो जान लेना कि वह निकट है, वरन् द्वार पर ही है।
34मैं तुमसे सच कहता हूँ, कि जब तक ये सब बातें पूरी न हो जाएं इस पीढ़ी का अन्त न होगा।
35आकाश और पृथ्वी टल जाएंगे, परन्तु मेरे वचन कभी न टलेंगे।
36“उस दिन या उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता-न तो स्वर्गदूत और न ही पुत्र, परन्तु केवल पिता।
37मनुष्य के पुत्र का आना ठीक नूह के दिनों के समान होगा।
38क्योंकि जलप्रलय के पूर्व के दिनों में जिस प्रकार नूह के जहाज़ में प्रवेश करने के दिन तक लोग खाते-पीते रहे, और उनमें ब्याह-शादियों हुआ करती थीं,
संबंधित पद
- यशायाह 40:8
घास तो सूख जाती और फूल मुर्झा जाता है, परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदा अटल रहेगा।”
- 1 पतरस 1:25
परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है।” और यही वह वचन है जिसका तुम्हें सुसमाचार सुनाया गया था।
- गिनती 23:19
परमेश्वर मनुष्य नहीं कि वह झूठ बोले, न वह मानव-पुत्र है कि पछताए। क्या वह कुछ कहे, और उसे न करे? या क्या वह कुछ बोले, और उसे पूरा न करे?
- यशायाह 55:11
उसी प्रकार मेरे मुंह से निकलने वाला वचन होगा। वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, वरन् मेरी इच्छा पूरी करेगा और जिस काम के लिए मैंने उसको भेजा है उसे पूरा करके ही लौटेगा।
- मत्ती 5:18
क्योंकि मैं तुमसे सच कहता हूँ कि जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जाएं, व्यवस्था में से एक मात्र या बिन्दु भी, जब तक कि सब कुछ पूरा न हो जाए, नहीं टलेगा।
- नीतिवचन 30:5
परमेश्वर का एक-एक वचन ताया हुआ हैः जो परमेश्वर की शरण लेते हैं उनके लिए वह ढाल है।
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