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पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 27 / 150

भजन संहिता 27

1दाऊद का भजन। यहोवा मेरी ज्योति और मेरा उद्धार है - मैं किससे डरूँ? यहोवा मेरे जीवन का दृढ़ गढ़ है- मैं किससे भयभीत होऊं?

2जब कुकर्मी मेरा मांस खा जाने को मुझ पर चढ़ आए, और मेरे विरोधी तथा शत्रु भी, तो वे ठोकर खाकर गिर पड़े।

3चाहे सेना भी मेरे विरुद्ध छावनी डाले, फिर भी मेरा हृदय भयभीत न होगा; चाहे मेरे विरुद्ध युद्ध भी छिड़ जाए, फिर भी मैं निश्चिंत बना रहूँगा।

4मैंने यहोवा से एक वर मांगा है, मैं उसी के यत्न में लगा रहूँगाः कि मैं अपने जीवन-भर यहोवा के भवन में ही निवास करने पाऊँ, जिससे यहोवा की मनोहरता निहारता रहूं और उसके मंदिर में उसका ध्यान करता रहू।

5विपत्ति के दिन तो वह मुझे अपने मंडप में छिपा रखेगा, वह मुझे अपने तम्बू के गुप्त स्थान में छिपा लेगा, वह मुझे चट्टान पर चढ़ा देगा।

6अब मेरा सिर मेरे चारों ओर के शत्रुओं से ऊंचा किया जाएगा, और मैं यहोवा के तम्बू में जय-जयकार के साथ बलिदान चढ़ाऊंगाः मैं गाऊँगा, हां, यहोवा की स्तुति के भजन गाऊँगा।

7हे यहोवा, जब मैं पुकारूँ तो मेरी पुकार सुन, मुझ पर अनुग्रह कर और मुझे उत्तर दे।

8जब तूने कहा, “मेरे दर्शन का खोजी हो” तो मेरे हृदय ने तुझसे कहा, “हे यहोवा, मैं तेरे दर्शन का खोजी होऊंगा।”

9अपना मुख मुझसे न छिपा। क्रोध में आकर अपने सेवक को दूर न भगा- तू तो मेरा सहायक रहा है। हे मेरे उद्धार करने वाले परमेश्वर, न मुझे त्याग, न मुझे छोड़।

10मेरे माता-पिता ने तो मुझे छोड़ दिया है परन्तु यहोवा मुझे सम्भाल लेगा।

11हे यहोवा, मुझे अपना मार्ग सिखा, और मेरे शत्रुओं के कारण समतल पथ पर मेरी अगुवाई कर।

12मुझे मेरे शत्रुओं की इच्छा पर न छोड़, क्योंकि झूठे गवाह मेरे विरुद्ध उठ खड़े हुए हैं जो हिंसा ही उगलते रहते है।

13यदि मुझे यह विश्वास न होता कि जीवितों की भूमि में यहोवा की भलाई को देखूँगा, तो मैं हताश हो गया होता।

14यहोवा की प्रतीक्षा करता रह। हियाव बांध और तेरा हृदय दृढ़ बना रहे। हां, यहोवा ही की प्रतीक्षा करता रह।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)