1 कुरिन्थियों 13:5
अभद्र व्यवहार नहीं करता, अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुराई का लेखा नहीं रखता,
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)
संदर्भ: 1 कुरिन्थियों 13
2यदि मुझे नबूवत करने का वरदान प्राप्त हो और मैं सब भेदों तथा सब प्रकार के ज्ञान को जानूं, और यदि मुझे यहां तक पूर्ण विश्वास हो कि मैं पहाड़ों को हटा सकूँ, पर प्रेम न रखूं तो मैं कुछ भी नहीं हूँ।
3यदि मैं अपनी सम्पूर्ण सम्पत्ति कंगालों को खिलाने के लिए दान कर दूं, और अपनी देह जलाने के लिए सौंप दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नही।
4प्रेम धैर्यवान है, प्रेम दयालु है और वह ईर्ष्या नहीं करता। प्रेम डींग नहीं मारता, अहंकार नहीं करता,
5अभद्र व्यवहार नहीं करता, अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुराई का लेखा नहीं रखता,
6अधर्म से आनन्दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्दित होता है।
7सब बातें सहता है, सब बातों पर विश्वास करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धैर्य रखता है।
8प्रेम कभी मिटता नही। नबूवतें हों तो समाप्त हो जाएंगी, भाषाएं हों तो जाती रहेंगी; और ज्ञान हो तो लुप्त हो जाएगा।
संबंधित पद
- 1 कुरिन्थियों 10:24
कोई अपने ही हित की चिन्ता न करे परन्तु दूसरों के हित की भी चिन्ता करे।
- फिलिप्पियों 2:3–5
स्वार्थ और मिथ्याभिमान से कोई काम न करो, परन्तु नम्रतापूर्वक अपनी अपेक्षा दूसरों को उत्तम समझो।
- 1 यूहन्ना 3:16–17
हम प्रेम को इसी से जानते हैं, कि उसने हमारे लिए अपना प्राण दे दिया। अतः हमें भाइयों के लिए अपना प्राण देना चाहिए।
- याकूब 1:19
हे मेरे प्रिय भाइयो, यह तो तुम जानते ही हो। अतः प्रत्येक व्यक्ति सुनने के लिए तो तत्पर, बोलने में धीरजवन्त, और क्रोध करने में धीमा हो।
- फिलिप्पियों 2:21
क्योंकि सब अपने स्वार्थ की खोज में रहते हैं, न कि मसीह यीशु की।
- गलातियों 6:1–2
हे भाइयो, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए तो तुम जो आत्मिक हो नम्रतापूर्वक उसे सम्भालो, परन्तु सतर्क रहो कि कहीं तुम भी परीक्षा में न पड़ जाओ।
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