पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 2 / 50
उत्पत्ति 2
1इस प्रकार आकाश और पृथ्वी तथा उनके समस्त गणों की रचना पूर्ण हुई।
2और परमेश्वर ने अपना कार्य जिसे वह करता था, सातवें दिन पूरा किया। और उसने सातवें दिन अपने उस सम्पूर्ण कार्य से जिसे वह करता था, विश्राम किया।
3तब परमेश्वर ने सातवें दिन को आशीषित किया और उसे पवित्र ठहराया, क्योंकि उस दिन सृष्टि के समस्त कार्य से जो उसने रचा और बनाया परमेश्वर ने विश्राम किया।
4आकाश और पृथ्वी के सृजे जाने का अर्थात् जिस दिन यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी और आकाश को बनाया उसका विवरण यह हैः
5उस समय मैदान का कोई पौधा पृथ्वी पर न था, और न ही मैदान का कोई पौधा उगा था, क्योंकि यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी पर जल नहीं बरसाया था, और भूमि पर खेती करने के लिए कोई मनुष्य भी नहीं था।
6परन्तु पृथ्वी से कुहरा उठता था जिससे भूमि की सारी सतह सिंच जाती थी।
7तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा, और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंकाः और आदम जीवित प्राणी बन गया।
8तब यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन में एक वाटिका लगाई, और उसमें आदम को जिसे उसने बनाया था, रखा।
9और यहोवा परमेश्वर ने सब प्रकार के वृक्ष जो देखने में मनोहर और खाने के लिए अच्छे थे, भूमि से उगाए, और वाटिका के बीच में जीवन के वृक्ष को तथा भले-बुरे के ज्ञान के वृक्ष को भी लगाया।
10वाटिका को सींचने के लिए अदन में से एक नदी बहती थी जो आगे बहकर चार नदियों में विभाजित हो जाती थी।
11पहली का नाम पीशोन है; यह हवीला नाम के सारे देश को, जहां सोना पाया जाता है, घेरे हुए है।
12उस देश का सोना उत्तम होता है। वहां मोती और सुलैमानी पत्थर भी मिलते है।
13दूसरी नदी का नाम गीहोन हैः यह कूश के सारे देश को घेरे हुए है।
14और तीसरी नदी का नाम दजला हैः यह अश्शूर के पूर्व की ओर बहती है। चौथी नदी का नाम फ़रात है।
15तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को लेकर अदन की वाटिका में रखा कि वह उसकी बागवानी आैर देख-भाल करे।
16फिर यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह कहकर आज्ञा दीः “तू वाटिका के किसी भी पेड़ का फल बेखटके खा सकता है,
17परन्तु जो भले और बुरे के ज्ञान का वृक्ष है-उसमें से कभी न खाना, क्योंकि जिस दिन तू उसमें से खाएगा उसी दिन तू अवश्य मर जाएगा।”
18फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, “आदम का अकेला रहना अच्छा नही। मैं इसके लिए एक उपयुक्त सहायक बनाऊंगा”
19और यहोवा परमेश्वर भूमि में से प्रत्येक जाति के वन-पशु और आकाश के सब प्रकार के पक्षियों को रचकर आदम के पास ले आया कि देखें कि वह उनका क्या-क्या नाम रखता है; और आदम ने प्रत्येक जीवित प्राणी को जो नाम दिया, वही उसका नाम हो गया।
20और आदम ने सब घरेलू पशुओं, आकाश के पक्षियों, और भूमि के सब वन-पशुओं के नाम रखे, पर आदम के योग्य कोई सहायक न मिला।
21अतः यहोवा परमेश्वर ने आदम को गहरी नींद में डाल दिया, और जब वह सो रहा था तो उसने उसकी एक पसली निकालकर उसके स्थान में मांस भर दिया।
22तब यहोवा परमेश्वर, आदम में से निकाली गई उस पसली से एक स्त्री की रचना करके, उसे आदम के पास ले आया।
23और आदम ने कहा, “यह तो मेरी हड्डियों में की हड्डी, और मेरे मांस में का मांस है; अतः यह नारी कहलाएगी, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है।”
24इस कारण पुरुष अपने माता-पिता को छोड़ कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा, और वे एक ही तन बने रहेंगे।
25आदम और उसकी पत्नी दानों नंगे थे, पर लजाते न थे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)