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याकूब 1:22

परन्तु अपने आप को वचन पर चलने वाले प्रमाणित करो, न कि केवल सुनने वाले जो स्वयं को धोखा देते है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: याकूब 1

19हे मेरे प्रिय भाइयो, यह तो तुम जानते ही हो। अतः प्रत्येक व्यक्ति सुनने के लिए तो तत्पर, बोलने में धीरजवन्त, और क्रोध करने में धीमा हो।

20क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर की धार्मिकता का निर्वाह नहीं कर सकता।

21इसलिए सारी मलिनता तथा समस्त दुष्टता को दूर करके उस वचन को नम्रतापूर्वक ग्रहण कर लो जो तुम में बोया गया है और जो तुम्हारे प्राणों को बचा सकता है।

22परन्तु अपने आप को वचन पर चलने वाले प्रमाणित करो, न कि केवल सुनने वाले जो स्वयं को धोखा देते है।

23यदि कोई मनुष्य वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना प्राकृतिक मुख दर्पण में देखता है।

24जब वह अपने आप को देखकर चला जाता है तो तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था।

25परन्तु जो व्यक्ति स्वतन्त्रता की सिद्ध व्यवस्था को लगन से देखता रहता है और उस पर बना रहता है, वह सुन कर भूल नहीं जाता, वरन् फलप्रद कार्य करता है-इसलिए वह आशिज पाएगा।

पूरा अध्याय पढ़ें: याकूब 1

संबंधित पद

  • रोमियों 2:13

    क्योंकि परमेश्वर के समक्ष व्यवस्था के सुननेवाले नहीं, परन्तु व्यवस्था का पालन करनेवाले धर्मी ठहराए जाएंगे।

  • लूका 6:46–48

    “जो मैं कहता हूँ जब तुम उसे नहीं मानते तो मुझे ‘हे प्रभु, हे प्रभु’ क्यों कहते हो?

  • यूहन्ना 13:17

    तुम इन बातों को जानते हो-यदि उनपर चलो तो तुम धन्य हो।

  • याकूब 4:17

    इसलिए जो कोई उचित काम करना जानता है और नहीं करता, उसके लिए यह पाप है।

  • 1 यूहन्ना 2:3

    यदि हम उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं, तो इसी से हमें ज्ञात होता है कि हम उसे जान गए है।

  • लूका 11:28

    परन्तु उसने कहा, “इसके विपरीत धन्य हैं वे जो परमेश्वर का वचन सुनते और उसका पालन करते है।”

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