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मरकुस 12:31

और दूसरी यह है, ‘तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करना।’ इनसे बढ़कर कोई और आज्ञा नही।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: मरकुस 12

28शास्त्रियों में से एक ने आकर उन्हें वाद-विवाद करते सुना, और यह जानकर कि उसने कैसे सुन्दर ढंग से उन्हें उत्तर दिया है, उससे पूछा, “सबसे प्रमुख आज्ञा कौन-सी है?”

29यीशु ने उत्तर दिया, “प्रमुख आज्ञा यह हैः ‘हे इस्राएल, सुन, प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है,

30और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे हृदय, और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि और अपनी सारी शक्ति से प्रेम करना।’

31और दूसरी यह है, ‘तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करना।’ इनसे बढ़कर कोई और आज्ञा नही।”

32शास्त्री ने उससे कहा, “हे गुरु, बिल्कुल ठीक, तूने सच ही कहा कि वह एक ही है; और उसको छोड़ कोई दूसरा नहीे;

33और उससे सारे हृदय, सारी बुद्धि, और सारी शक्ति से प्रेम करना, और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करना, सारे होमबलि और बलिदानों से बढ़कर है।”

34जब यीशु ने देखा कि उसने समझदारी से उत्तर दिया है, तो उससे कहा, “तू परमेश्वर के राज्य से दूर नहीं,” इसके बाद किसी को उससे कुछ पूछने का साहस न हुआ।

पूरा अध्याय पढ़ें: मरकुस 12

संबंधित पद

  • रोमियों 13:8–9

    पारस्परिक प्रेम के अतिरिक्त अन्य किसी विषय में किसी के ट्टणी न बनो; क्योंकि जो पड़ोसी से प्रेम करता है, उसने व्यवस्था को पूर्ण किया है।

  • मत्ती 22:39

    और इसी के समान दूसरी यह हैः ‘तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम कर।’

  • लैव्यवस्था 19:18

    तू अपना बदला न लेना और न अपने जाति-भाइयों से वैमनस्य रखना, परन्तु अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना, मैं यहोवा हू।

  • लूका 10:27

    उसने उत्तर दिया, तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सम्पूर्ण हृदय, सम्पूर्ण प्राण, सम्पूर्ण शक्ति तथा सम्पूर्ण बुद्धि से प्रेम कर तथा अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम कर।”

  • 1 कुरिन्थियों 13:4–8

    प्रेम धैर्यवान है, प्रेम दयालु है और वह ईर्ष्या नहीं करता। प्रेम डींग नहीं मारता, अहंकार नहीं करता,

  • मत्ती 7:12

    इसलिए जैसा कि तुम चाहते हो कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें तुम भी उनके साथ वैसा ही करो, क्योंकि व्यवस्था और नबी यही सिखाते है।

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