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फिलिप्पियों 2:5

अपने में वही स्वभाव रखो जो मसीह यीशु में था,

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: फिलिप्पियों 2

2तो मेरा आनन्द पूर्ण करने के लिए एक ही मन, एक ही प्रेम, एक ही भावना और एक ही दृष्टिकोण रखो।

3स्वार्थ और मिथ्याभिमान से कोई काम न करो, परन्तु नम्रतापूर्वक अपनी अपेक्षा दूसरों को उत्तम समझो।

4तुम में से प्रत्येक अपना ही नहीं, परन्तु दूसरों के हित का भी ध्यान रखे।

5अपने में वही स्वभाव रखो जो मसीह यीशु में था,

6जिसने परमेश्वर के स्वरूप में होते हुए भी परमेश्वर के समान होने को अपने अधिकार में रखने की वस्तु न समझा।

7उसने अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया कि दास का स्वरूप धारण कर मनुष्य की समानता में हो गया।

8इस प्रकार मनुष्य के रूप में प्रकट होकर स्वयं को दीन किया और यहां तक आज्ञाकारी रहा कि मृत्यु वरन् क्रूस की मृत्यु भी सह ली।

पूरा अध्याय पढ़ें: फिलिप्पियों 2

संबंधित पद

  • 1 यूहन्ना 2:6

    जो कहता है कि मैं उस में बना रहता हूँ तो वह स्वयं भी वैसा ही चले जैसा कि वह चलता था।

  • मत्ती 11:29

    मेरा जुआ अपने ऊपर उठा लो और मुझसे सीखो, क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूँ, और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे।

  • 1 पतरस 2:21

    तुम इसी अभिप्राय से बुलाए गए हो, क्योंकि मसीह ने भी तुम्हारे लिए दुख सहा और तुम्हारे लिए एक आदर्श रखा कि तुम भी उसके पद-चिह्नों पर चलो।

  • 1 पतरस 4:1

    इसलिए, जबकि मसीह ने शरीर में दुख उठाया तो तुम भी इसी अभिप्राय से हथियार धारण करो, क्योंकि जिसने शरीर में दुख उठाया है, वह पाप से छूट गया है।

  • 1 कुरिन्थियों 10:33–11:1

    जिस प्रकार मैं भी सब बातों में सब मनुष्यों को प्रसन्न करता हूं और अपने ही लाभ की नहीं, परन्तु बहुतों के लाभ की चिन्ता करता हूं कि वे उद्धार पाए।

  • मत्ती 20:26–28

    तुममें ऐसा न हो। जो कोई तुममें बड़ा बनना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने,

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).