Loading account

नीतिवचन 18:21

जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं- जो उससे प्रेम रखते हैं वे उसका फल पाएंगे।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)

संदर्भ: नीतिवचन 18

18चिट्ठी डालकर निर्णय करने से झगड़े बन्द होते हैं, और इससे सबल विरोधियों का आपस में निर्णय होता है।

19रूठे हुए भाई को मनाना दृढ़ नगर पर जय प्राप्त करने से अधिक कठिन हैं, और झगड़े गढ़ के बेंड़ों के सदृश होते है।

20मनुष्य का पेट उसकी बातों के फल से भरता है, और वह अपने होंठों के फल से संतुष्ट होता है।

21जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं- जो उससे प्रेम रखते हैं वे उसका फल पाएंगे।

22जो पत्नी पाता है, वह उत्तम वस्तु पाता है, और यहोवा से अनुग्रह प्राप्त करता है।

23निर्धन मनुष्य तो गिड़गिड़ाकर बोलता है, पर धनी रूखेपन से उत्तर देता है।

24जिस मनुष्य के कई मित्र होते हैं, उसका तो विनाश हो सकता है, परन्तु एक ऐसा भी मित्र है जो भाई से भी बढ़कर साथ देता है।

पूरा अध्याय पढ़ें: नीतिवचन 18

संबंधित पद

  • इफिसियों 4:29

    कोई अशलील बात तुम्हारे मुंह से न निकले, परन्तु केवल ऐसी बात निकले जो उस समय की आवश्यकता के अनुसार उन्नति के लिए उत्तम हो, जिससे कि सुनने वालों पर अनुग्रह हो।

  • मत्ती 12:35–37

    भला मनुष्य अपने भले भण्डार से भली बातें निकालता है; और बुरा मनुष्य अपने बुरे भण्डार से बुरी बातें निकालता है।

  • कुलुस्सियों 4:6

    तुम्हारी बातचीत सदैव अनुग्रहमयी और सलोनी हो कि तुम प्रत्येक व्यक्ति को उचित उत्तर देना जान जाओ।

  • नीतिवचन 10:19–21

    जहाँ बहुत बातें होती हैं, वहीं अपराध भी अवश्य होता है, पर जो अपने होंठों पर लगाम लगाता है, वह बुद्धिमान है।

  • याकूब 3:6–9

    और जीभ भी एक अग्नि अर्थात् अधर्म का एक लोक है। हमारे अंगों में स्थित यह जीभ सारे शरीर को कलंकित करती और हमारे जीवन की गति में आग लगा देती है, और नरक की अग्नि में जलती रहती है।

  • नीतिवचन 13:2–3

    मनुष्य अपने मुंह के फल के कारण भली वस्तुओं का आनन्द उठाता है, परन्तु विश्वासघाती का आनन्द तो हिंसा में ही होता है।

Cross-references ranked with OpenBible.info data (CC BY).