पुराना नियम · भजन संहिता · अध्याय 119 / 150
भजन संहिता 119
1क्या ही धन्य हैं वे जो चाल के खरे हैं, और यहोवा की व्यवस्था पर चलते है।
2क्या ही धन्य हैं वे जो उसकी चेतावनियों को मानते हैं, और उसको सम्पूर्ण हृदय से खोजते हैं,
3और कुटिलता का काम नहीं करते; वे तो यहोवा के मार्गों में चलते है।
4तूने अपने उपदेश इसलिए दिए हैं, कि हम उन्हें यत्न से माने।
5भला हो कि तेरी विधियों को मानने के लिए मेरा मार्ग दृढ़ हो जाए!
6तब तेरी सब आज्ञाओं पर मनन करते हुए, मैं लज्जित न होऊंगा।
7तेरे धर्ममय नियमों को सीखते हुए, मैं सीधे मन से तेरा धन्यवाद करूंगा।
8मैं तेरी विधियों को मानूंगा; मुझे पूरी रीति से त्याग न देे! बैथ
9जवान अपनी चाल को कैसे शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार चलने से।
10मैंने तुझे सम्पूर्ण हृदय से खोजा है; अपनी आज्ञाओं से मुझे भटकने न दे।
11तेरे वचन को मैंने अपने हृदय में संचित किया है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करू।
12हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा।
13तेरे मुंह से निकले सब नियमों का वर्णन, मैंने अपने होठों से किया है।
14मैं तेरी चेतावनियों के मार्ग से ऐसा हर्षित हुआ हूं जैसा सब प्रकार के धन से।
15मैं तेरे उपदेशों पर मनन, और तेरे मार्गों पर ध्यान करूंगा।
16मैं तेरी विधियों से आनन्दित होऊंगा, और तेरे वचन को न भूलूँगा। गिमेल
17अपने दास पर उपकार कर, कि मैं जीवित रहूं और तेरे वचन पर चलू।
18मेरी अांखें खोल दे कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकू।
19मैं पृथ्वी पर परदेशी हूं; अपनी आज्ञाओं को मुझसे न छिपा,
20मेरा मन तेरे नियमों की अभिलाषा से हर समय बेचैन रहता है।
21तू अंहकारियों को जो शापित हैं, झिड़कता है, वे तेरी आज्ञाओं से भटके हुए है।
22निन्दा और अपमान को मुझसे दूर कर, क्योंकि मैं तेरी चेतावनियों को मानता हू।
23यघपि प्रधान बैठकर मेरे विरुद्ध बातें किया करते हैं, फिर भी तेरा दास तेरी विधियों पर मनन करता है।
24तेरी चेतावनियां तो मेरा आनन्द हैं; वे मेरी सलाहकार है। दालथ
25मैं धूल में पड़ा हूं: तू अपने वचन के अनुसार मुझे फिर से जिला।
26मैंने अपना चाल-चलन तुझे बताया, और तूने मुझे उत्तर दिया; अपनी विधियां मुझे सिखा।
27अपने उपदेशों का मार्ग मुझे समझा, जिससे कि मैं तेरे अद्भुत कार्यों पर ध्यान दू।
28दुख के कारण मेरा प्राण गिरा जाता है, अपने वचन के द्वारा मुझे सम्भाल।
29झूठ का मार्ग मुझसे दूर कर, और करुणा करके अपनी व्यवस्था मुझे दे।
30मैंने सच्चाई का मार्ग चुन लिया है, मैंने तेरे नियम अपने सामने रखे है।
31मैं तेरी चेतावनियों में लवलीन रहता हूं, हे यहोवा, मुझे लज्जित होने न दे।
32मैं तेरी आज्ञाओं के मार्ग में दौडूंगा, क्योंकि तू मेरा साहस बढ़ाएगा। हे
33हे यहोवा, मुझे अपनी विधियों का मार्ग दिखा, तब मैं अन्त तक उस पर चलूंगा।
34मुझे समझ दे कि मैं तेरी व्यवस्था पर ध्यान दूं और सम्पूर्ण मन से उस पर चलू।
35मुझे अपनी आज्ञाओं के पथ पर चला, क्योंकि मैं उससे प्रसन्न होता हू।
36मेरे मन को अनुचित लाभ की ओर नहीं, वरन् अपनी चेतावनियों की ओर लगा।
37मेरी अांखों को व्यर्थ वस्तुओं की ओर से फेर दे, और अपने मार्गों में मुझे फिर से जिला।
38अपने वचन को अपने दास के लिए पूरा कर जिससे तेरा भय माना जाए।
39जिस निन्दा से मैं डरता हूं उसे दूर कर, क्योंकि तेरे नियम उत्तम है।
40देख, मैं तेरे उपदेशों का अभिलाषी हूं; अपनी धार्मिकता के द्वारा मुझे फिर से जिला। वाव
41हे यहोवा, तेरी करुणा, और तेरे वचन के अनुसार तेरा उद्धार, मुझे मिले।
42तब मैं अपनी निन्दा करने वाले को उत्तर दे सकूंगा, क्योंकि मैं तेरे वचन पर भरोसा रखता हू।
43मेरे मुंह से सत्य का वचन कदापि न छीन, क्याेंकि मैं तेरे नियमों पर आशा रखता हू।
44तब मैं तेरी व्यवस्था पर लगातार, सदा-सर्वदा चलता रहूंगा।
45और मैं स्वतन्त्रता से चलूंगा, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों का खोजी हू।
46मैं तेरी चेतावनियों की चर्चा राजाओं के सामने भी करूंगा, और लज्जित न होऊंगा।
47और मैं तेरी आज्ञाओं में मग्न रहूंगा, जिनसे मैं प्रेम करता हू।
48और मैं तेरी आज्ञाओं की ओर जिनसे मैं प्रेम करता हूं, हाथ फैलाऊंगा, और तेरी विधियों पर मनन करूंगा। ज़ाइन
49अपने दास को दिए हुए वचन स्मरण रख, जिसके द्वारा तूने मुझे आशा दी है।
50मेरे दुख में मुझे शान्ति इसी से है, कि तेरे वचन ने मुझे जिलाया है।
51अहंकारियों ने मेरा बहुत ठट्ठा किया है, फिर भी मैं तेरी व्यवस्था से नहीं हटता।
52हे यहोवा, मैं प्राचीनकाल के तेरे नियमों को स्मरण करके शान्ति पाता रहा हू।
53जिन दुष्टों ने तेरी व्यवस्था को छोड़ दिया है, उनके कारण मुझे क्रोध की जलन ने आ घेरा है।
54मेरी जीवन-यात्रा के डेरे में तेरी विधियां मेरे गीत बने है।
55हे यहोवा, रात को मैं तेरा नाम स्मरण किया करता, और तेरी व्यवस्था पर चलता हू।
56मेरा भाग तो यही है, कि मैं तेरे उपदेशों को मानू। ख़ेथ
57यहोवा मेरा भाग है; मैंने तेरे वचनों को मानने की प्रतिज्ञा की है।
58मैंने पूरे मन से तुझसे विनय की है, अपने वचन के अनुसार मुझ पर अनुग्रह कर।
59मैंने अपने चाल-चलन पर विचार किया, और तेरी चेतावनियों का मार्ग लिया।
60मैंने तेरी आज्ञाओं को मानने में देर नहीं, शीघ्रता की है।
61दुष्टों के बन्धनों ने मुझे जकड़ लिया है, परन्तु मैं तेरी व्यवस्था को नहीं भूला हू।
62तेरे धर्ममय नियमों के कारण, मैं आधी रात को उठकर तेरा धन्यवाद करूंगा।
63जो तेरा भय मानते और तेरे उपदेशों पर चलते हैं, उन सबका मैं साथी हू।
64हे यहोवा, पृथ्वी तेरी करुणा से भरपूर है, मुझे अपनी विधियां सिखा। टेथ
65हे यहोवा, तूने अपने वचन के अनुसार, अपने दास के साथ भलाई की है।
66मुझे भला विवेक और ज्ञान दे, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं पर विश्वास करता हू।
67पीड़ित होने से पहले मैं भटक गया था, परन्तु अब मैं तेरे वचन को मानता हू।
68तू भला है और भला करता भी है; मुझे अपनी विधियां सिखा।
69अहंकारियों ने मेरे विरुद्ध झूठ गढ़ा है, फिर भी मैं तेरे उपदेशों पर पूरे मन से चलूंगा।
70उनके हृदय पर चर्बी छा गई है, परन्तु मैं तेरी व्यवस्था में आनन्दित हू।
71मुझ पर जो क्लेश आया वह मेरे लिए भला ही हुआ कि मैं तेरी विधियों को सीख सकू।
72तेरे मुंह की व्यवस्था मेरे लिए सोने और चांदी के हजारों सिक्कों से भी उत्तम है। योध
73तेरे हाथों ने मुझे सृजा और संवारा है; मुझे समझ दे कि मैं तेरी आज्ञाओं को सीख सकू।
74जो तेरा भय मानते हैं वे मुझे देख कर आनन्दित हों, क्योंकि मैं तेरे वचन की आस लगाए हू।
75हे यहोवा, मैं जानता हूं कि तेरे न्याय धर्ममय हैं, और तूने अपनी सच्चाई के अनुसार मुझे क्लेश में डाला है।
76तेरे वचन के अनुसार तेरे दास को, अर्थात् मुझे तेरी करुणा से शान्ति मिले।
77तेरी दया मुझ पर हो कि मैं जीवित रहूं, क्याेंकि तेरी व्यवस्था मेरा आनन्द है।
78अहंकारी लज्जित हों, क्योंकि वे छल से मुझे हानि पहुंचाते हैं; परन्तु मैं तो तेरे उपदेशों पर मनन करूंगा।
79जो तेरा भय मानते, हां, वे जो तेरी विधियों को जानते हैं, वे मेरी ओर फिरे।
80मेरा मन तेरी विधियों के प्रति सिद्ध हो, कि मैं लज्जित न होऊ। काफ़
81मेरा प्राण तुझसे उद्धार पाने के लिए बेचैन है; मैं तो तेरे वचन की आस लगाए हू।
82तेरे वचन की प्रतीक्षा करते-करते मेरी अांखें धुंधली पड़ गई हैं, मैं कहता हूं, “तू मुझे कब शान्ति देगा?”
83यघपि मैं धुएं में रखी मशक के समान हो गया हूं, फिर भी तेरी विधियों को नहीं भूलता।
84तेरे दास के कितने दिन रह गए हैं? मेरे सताने वालों को तू कब दण्ड देगा?
85अहंकारी जो तेरी व्यवस्था के अनुसार नहीं चलते- उन्होंने मेरे लिए गड्हे खोदे है।
86तेरी सब आज्ञाएं विश्वसनीय हैं; लोगों ने झूठ बोल-बोल कर मुझे सताया है-मेरी सहायता कर!
87उन्होेंने तो पृथ्वी पर से मेरा सर्वनाश कर ही डाला था, परन्तु मैंने तेरे उपदेशों को नहीं छोड़ा।
88अपनी करुणा के अनुसार मुझे फिर से जिला, कि मैं तेरे मुंह की चेतावनियों को मानू। लामेध
89हे यहोवा, तेरा वचन आकाश में सदा तक स्थिर रहता है।
90तेरी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है; तूने पृथ्वी को स्थापित किया, और वह स्थिर है।
91तेरे नियमों के अनुसार वे आज भी बने हैं, क्योंकि सब कुछ तेरे अधीन है।
92यदि तेरी व्यवस्था मेरा आनन्द न होती, तो मैं अपने संकट में ही नष्ट हो जाता।
93मैं तेरे उपदेशों को कभी न भूलूंगा, क्योंकि उन्हीं के द्वारा तूने मुझे जिलाया है।
94मैं तेरा हूं, मुझे बचा, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों का खोजी हू।
95दुष्ट मेरा विनाश करने की घात में हैं, मैं तेरी चेतावनियों पर यत्न से ध्यान करूंगा।
96मैंने समस्त पूर्णता की एक सीमा देखी है, परन्तु तेरी आज्ञा तो असीमित है। मेम
97अहा, मैं तेरी व्यवस्था से कितनी प्रीति रखता हूं! दिन-भर मेरा ध्यान उसी पर लगा रहता है।
98तेरी आज्ञाएं मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान बनाती हैं, क्योंकि वे सदा मेरे साथ रहती है।
99मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूं, क्योंकि मेरा ध्यान तेरी चेतावनियों पर लगा रहता है।
100मैं बुजुर्गों से अधिक समझदार हूं, क्योंकि मैं तेरे उपदेशों को मानता हू।
101मैंने अपने पैरों को प्रत्येक बुरे मार्ग से रोक रखा है, कि तेरे वचन पर चलू।
102मैं तेरे नियमों से नहीं हटा हूं, क्योंकि तूने ही मुझे सिखाया है।
103तेरे वचन मुझको कितने मीठे लगते हैं, हां, मेरे मुंह में मधु से भी मीठे हैं!
104तेरे उपदेशों से मुझे समझ प्राप्त होती है; इसलिए मैं प्रत्येक झूठे मार्ग से घृणा करता हू। नून
105तेरा वचन मेरे पांव के लिए दीपक, और मेरे मार्ग के लिए उजियाला है।
106मैंने शपथ खाई है और इसी पर अटल हूं कि मैं तेरे धर्ममय नियमों का पालन करूँगा।
107मैं अत्यन्त दुख में पड़ा हूं; हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे फिर से जिला।
108हे यहोवा, मेरे मुंह की स्वेच्छाबलियों को ग्रहण कर, और मुझे अपने नियम सिखा।
109मैं अपना प्राण निरन्तर हथेली पर लिए तो रहता हूं, फिर भी तेरे नियमों को नहीं भूलता।
110दुष्टों ने मेरे लिए जाल बिछाया तो है, फिर भी मैं तेरे उपदेशों से नहीं भटका।
111तेरी चेतावनियां सदा के लिए मेरी मीरास ठहरी हैं, क्योंकि उनसे मेरा हृदय हर्षित होता है।
112मैंने सदा के लिए तेरी विधियों पर मन लगाया है कि अन्त तक उन पर चलता रहू। सामेख
113दुचित्तों से तो मैं घृणा, परन्तु तेरी व्यवस्था से प्रेम करता हू।
114तू मेरा शरणस्थान और मेरी ढाल है; मैं तेरे वचन की आस लगाए हू।
115हे कुकर्मियों, मुझसे दूर हो जाओ, कि मैं अपने परमेश्वर की आज्ञाओं को मान सकू।
116तू अपने वचन के अनुसार मुझे सम्भाल, कि मैं जीवित रहूं; और मेरी आशा के कारण मुझे लज्जित न होने दे।
117मुझे सम्भाल कि मैं सुरक्षित रहूं और निरन्तर तेरी विधियों का आदर कर सकू।
118जितने तेरी विधियों से भटक जाते हैं, उन सबको तूने तुच्छ जाना है, क्योंकि उनका छल व्यर्थ है।
119तूने पृथ्वी के सब दुष्टों को धातु के मैल की तरह निकाल दिया है, इसलिए मैं तेरी चेतावनियों से प्रीति रखता हू।
120तेरे भय से मेरा शरीर कांप उठता है, और मैं तेरे निर्णयों से डरता हू। ऐयिन
121मैंने न्याय और धार्मिकता का आचरण किया है, तू मेरे सताने वालों के हाथ में मुझे न छोड़।
122अपने दास की भलाई के लिए तू ही जामिन बन; अहंकारी मुझ पर अत्याचार न करने पाए।
123मेरी आंखें तेरे उद्धार और तेरे धर्ममय वचन की प्रतीक्षा करते-करते धुंधली पड़ गई है।
124अपने दास के साथ अपनी करुणा के अनुसार व्यवहार कर, और अपनी विधियां मुझे सिखा।
125मैं तो तेरा दास हूं, तू मुझे समझ दे, कि मैं तेरी चेतावनियों को जान लू।
126वह समय आया है कि यहोवा कार्य करे; उन्होंने तो तेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया है।
127इसलिए मैं तेरी आज्ञाओं को सोने से, वरन् कुन्दन से भी बढ़कर प्रिय जानता हू।
128इसलिए मैं तेरे सब उपदेशों को हर बात में ठीक मानता हूं, और प्रत्येक मिथ्या-मार्ग से घृणा करता हू। पे
129तेरी चेतावनियां अद्भुत हैं; इसलिए मैं उनको मानता हू।
130तेरे वचनों के खुलने से प्रकाश मिलता है; उससे भोले लोग समझ प्राप्त करते है।
131मैं मुंह खोलकर हांफने लगा, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं का प्यासा था।
132अपने नाम से प्रेम रखने वालों के साथ जैसी तेरी रीति है, वैसे ही मेरी ओर फिर कर मुझ पर अनुग्रह कर।
133तू अपने वचन पर मेरे कदम स्थिर कर, तथा किसी भी अधर्म को मुझ पर प्रभुता न करने दे।
134मनुष्य के अत्याचार से मुझे छुड़ा ले, कि मैं तेरे उपदेशों का पालन करू।
135अपने दास पर अपने मुख का प्रकाश चमका, और मुझे अपनी विधियां सिखा।
136मेरी अांखों से जल-धाराएं बहती रहती हैं, क्योंकि लोग तेरी व्यवस्था का पालन नहीं करते। त्सादे
137हे यहोवा, तू धर्मी है, और तेरे नियम खरे है।
138तूने अपनी चेतावनियाें को धार्मिकता और पूरी सत्यता से कहा है।
139तेरी धुन मुझे खा गई है, क्योंकि मेरे शत्रु तेरे वचनों को भूल गए है।
140तेरा वचन पूर्णतः ताया हुआ है, इसलिए तेरा दास उससे प्रेम करता है।
141मैं छोटा और तुच्छ हूं, फिर भी मैं तेरे उपदेशों को नहीं भूलता।
142तेरी धार्मिकता तो सदा की धार्मिकता है, और तेरी व्यवस्था सत्य है।
143संकट और वेदना मुझ पर आ पड़े हैं, फिर भी तेरी आज्ञाएं मेरा आनन्द है।
144तेरी चेतावनियां सदा धर्ममय हैं; मुझे समझ दे कि मैं जीवित रहू। कोप़फ़
145मैंने सम्पूर्ण हृदय से पुकारा है; हे यहोवा, मुझे उत्तर दे! मैं तेरी विधियों को मानूंगा।
146मैंने तुझे पुकारा है; मुझे बचा ले, और मैं तेरी चेतावनियों को मानूंगा।
147भोर होने से पहले ही उठकर मैं सहायता के लिए तुझे पुकारता हूं; मैं तेरे वचनों की आस लगाए हू।
148मेरी अांखें तो रात के हर पहर से पहले ही खुल जाती हैं, कि मैं तेरे वचन पर मनन करू।
149अपनी करुणा के अनुसार मेरी सुन ले; हे यहोवा, अपने नियमों के अनुसार मुझे फिर से जिला।
150जो दुष्टता की धुन में हैं, निकट आ पहुंचे हैं, पर तेरी व्यवस्था से वे दूर है।
151हे यहोवा, तू निकट है, और तेरी सब आज्ञाएं सत्य है।
152प्राचीनकाल से मैं तेरी चेतावनियों के द्वारा जान गया हूं, कि तूने उसकी नींव सदा के लिए डाली है। रेश
153मेरे दुख को देख और मुझे छुड़ा ले, क्योंकि मैं तेरी व्यवस्था को भूलता नही।
154मेरा मुकद्दमा लड़ और मुझे छुड़ा ले; अपने वचन के अनुसार मुझे फिर से जिला।
155उद्धार तो दुष्टों से दूर है, क्योंकि वे तेरी विधियों के खोजी नही।
156हे यहोवा, तेरी दया अति महान् है; अपने नियमों के अनुसार मुझे फिर से जिला।
157मेरे सताने वाले और मेरे विरोधी तो बहुत हैं, फिर भी मैं तेरी चेतावनियों से नहीं हटता।
158मैं विश्वासघातियों को देख कर घृणा करता हूं, क्योंकि वे तेरे वचन को नहीं मानते।
159देख, मैं तेरे नियमों से कैसी प्रीति रखता हूं, हे यहोवा, अपनी करुणा के अनुसार मुझे फिर से जिला।
160तेरा सम्पूर्ण वचन सत्य ही है, और तेरा एक-एक धर्ममय नियम सनातन है। शीन
161प्रधान मुझे व्यर्थ ही सताते हैं, परन्तु मेरा हृदय तेरे वचनों का भय मानता है।
162जैसे बड़ी लूट पाकर कोई हर्षित होता है वैसे ही मैं तेरे वचन से हर्षित होता हू।
163झूठ से तो मैं बैर और घृणा करता हूं, पर तेरी व्यवस्था से प्रीति रखता हू।
164तेरे धर्ममय नियमों के कारण, मैं दिन में सात बार तेरी स्तुति करता हू।
165जो तेरी व्यवस्था से प्रीति रखते हैं उन्हें बड़ी शान्ति मिलती है, और उनको किसी बात से ठोकर नहीं लगती।
166हे यहोवा, मैं तेरे उद्धार की आस लगाए हूं, और तेरी आज्ञाओं को मानता आया हू।
167मैं तेरी चेतावनियों को मानता हूं, और वे मेरे लिए अत्यधिक प्रिय है।
168मैंने तेरे उपदेशों और चेतावनियों को माना है; मेरा सारा चाल-चलन तो तेरे सम्मुख प्रकट है। ताव
169हे यहोवा, मेरी पुकार तुझ तक पहुंचे; तू अपने वचन के अनुसार मुझे समझ दे।
170मेरी विनती तेरे सम्मुख पहुंचे, अपने वचन के अनुसार मुझे छुड़ा।
171मेरे होंठ तेरी स्तुति करें, क्योंकि तू मुझे अपनी विधियां सिखाता है।
172मेरी जीभ तेरे वचन का गीत गाए, क्योंकि तेरी सब आज्ञाएं धार्मिकता ही है।
173तेरा हाथ मेरी सहायता करे, क्योंकि मैंने तेरे उपदेशों को अपना लिया है।
174हे यहोवा, मैं तेरे उद्धार का अभिलाषी हूं, और तेरी व्यवस्था मेरा आनन्द है।
175मैं जीवित रहूं कि तेरी स्तुति करूं, और तेरे नियम मेरी सहायता करे।
176मैं खोई हुई भेड़ के समान भटक गया हूं; अपने दास को ढूंढ़ ले, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं को भूला नहीं हू।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)