Loading account

नया नियम · 1 कुरिन्थियों · अध्याय 15 / 16

1 कुरिन्थियों 15

1हे भाइयो, अब मैं तुम्हें वही सुसमाचार सुनाता हूं जिसका मैंने तुम्हारे मध्य प्रचार किया, जिसे तुमने ग्रहण भी किया और जिसमें तुम स्थिर हो,

2जिसके द्वारा तुम उद्धार भी पाते हो, इस शर्त पर कि तुम उस वचन को जिसका मैंने तुम्हारे मध्य प्रचार किया दृढ़ता से थामे रहो-अन्यथा तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ।

3मैंने यह बात जो मुझ तक पहुंची थी उसे सब से मुख्य जानकर तुम तक भी पहुंचा दी, कि पवित्रशास्त्र के अनुसार मसीह हमारे पापों के लिए मरा,

4और गाड़ा गया, तथा पवित्रशास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा,

5तब वह कैफा को, और फिर बारहों को दिखाई दिया।

6इसके पश्चात् वह पांच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया, जिनमें से अधिकांश अब तक जीवित हैं, पर कुछ सो गए।

7तब वह याकूब को दिखाई दिया, और फिर सब प्रेरितों को,

8और सब से अंत में मुझे भी दिखाई दिया, जो मानो अधूरे समय का जन्मा हूं।

9मैं प्रेरितों में सब से छोटा हूं जो प्ररित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्योंकि मैंने परमेश्वर की कलीसिया को सताया था।

10फिर भी परमेश्वर के अनुग्रह से मैं अब जो हूं सो हूं। मेरे प्रति उसका अनुग्रह व्यर्थ नहीं ठहरा, परन्तु मैंने उन सब से बढ़कर परिश्रम किया, फिर भी मैंने नहीं, परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह ने मेरे साथ मिलकर किया।

11अतः चाहे मैं हूं, चाहे वे हों, हम यही प्रचार करते हैं, और इसी पर तुमने विश्वास किया।

12अब यदि मसीह का यह प्रचार किया जाता है कि वह मृतकों में से जिलाया गया है तो तुम में से कुछ यह क्यों कहते हैं कि मरे हुओं का पुनरुत्थान है ही नहीं?

13यदि मरे हुओं का पुनरुत्थान नहीं है तो मसीह भी नहीं जिलाया गया।

14और यदि मसीह जिलाया नहीं गया तो हमारा प्रचार करना व्यर्थ है, और तुम्हारा विश्वास भी व्यर्थ है।

15इस से भी बढ़कर हम परमेश्वर के झूठे गवाह ठहरते हैं, क्योंकि हमने परमेश्वर के विषय में यह साक्षी दी कि उसने मसीह को जिला उठाया। परन्तु यदि मृतक वास्तव में जिलाए नहीं जाते तो उसने मसीह को भी नहीं जिलाया।

16क्योंकि यदि मृतक जिलाए नहीं जाते तो मसीह भी जिलाया नहीं गया है,

17और यदि मसीह नहीं जिलाया गया है तो तुम्हारा विश्वास व्यर्थ है। तुम अब तक अपने पापों में पड़े हो।

18तब तो वे भी जो मसीह में सो गए हैं, नाश हो गए।

19यदि हमने केवल इसी जीवन में मसीह पर आशा रखी है तो हमारी दशा सब मनुष्यों से अधिक दयनीय है।

20पर अब मसीह तो मृतकों में सेे जिलाया गया है, और जो सोए हुए हैं उनमें वह पहला फल है।

21क्योंकि जब एक मनुष्य के द्वारा मृत्यु आई तो एक मनुष्य के द्वारा मृतकों का पुनरुत्थान भी आया।

22जिस प्रकार आदम में सब मरते हैं उसी प्रकार मसीह में सब जिलाए जाएंगे,

23पर हर एक अपने क्रम के अनुसारः प्रथम फल मसीह है, तब मसीह के आगमन पर उसके लोग।

24इसके पश्चात् अन्त होगा। उस समय वह समस्त शासन, अधिकार और सामर्थ्य का अन्त करके राज्य को परमेश्वर पिता के हाथ मैं सौंप देगा।

25जब तक वह अपने सब शत्रुओं को पैरों तले न कर ले, उसका राज्य करना अनिवार्य है।

26सब से अन्तिम शत्रु जिसका अन्त किया जाएगा वह मृत्यु है।

27क्योंकि ‘‘उसने सब कुछ उसके पैरों तले कर दिया है।’’ परन्तु जब वह कहता है कि सब कुछ अधीन कर दिया गया है तो यह स्पष्ट है कि जिसने सब कुछ उसके अधीन कर दिया है, वह स्वयं अलग रहा।

28और जब सब अधीन हो जाएगा तो पुत्र स्वयं ही उसके अधीन हो जाएगा, जिसने सब कुछ उसके अधीन कर दिया, जिससे कि परमेश्वर ही सब में सब कुछ हो।

29अन्यथा जो मरे हुओं के लिए बपतिस्मा लेते हैं वे क्या करेंगे? यदि मृतक जिलाए ही नहीं जाते हैं तो फिर उनके लिए इन्हें क्यों बपतिस्मा दिया जाता है?

30हम भी क्यों प्रत्येक घड़ी संकट में रहते हैं?

31हे भाइयो, मेरे उस घमण्ड के कारण जो मसीह यीशु हमारे प्रभु में तुम्हारे लिए है, मैं दृढ़तापूर्वक कहता हूँ कि मैं प्रतिदिन मरता हू।

32यदि मैं इफिसुस में वन-पशुओं से लड़ा, तो मानवीय भाव से मुझे क्या लाभ? यदि मृतक जिलाए नहीं जाते, ‘तो आओ, खाएं और पिएं, क्याेंकि कल तो मरना ही है।

33धोखा न खाओः ‘‘बुरी संगति अच्छे चरित्र को भ्रष्ट कर देती है।’’

34धार्मिकता के लिए सजग हो जाओ और पाप न करो, क्योंकि कुछ लोग परमेश्वर को बिल्कुल नहीं जानते। मैं कहता हूं यह तुम्हारे लिए लज्जा की बात है।

35परन्तु कोई कहेगा, ‘‘मृतक कैसे जिलाए जाते हैं? और वे किस प्रकार की देह में आते हैं?

36हे मूर्ख! जो कुछ तू बोता है जब तक वह मर न जाए जिलाया नहीं जाता।

37और जो कुछ तू बोता है, तू वह देह नहीं बोता जो उत्पन्न होने वाली है, परन्तु निरा दाना, चाहे गेहूं का या किसी और अनाज का।

38परन्तु परमेश्वर अपने इच्छानुसर उसे देह देता है, और हर एक बीज को उसकी विशेज देह।

39सब शरीर एक समान हीं, परन्तु मनुष्यों का शरीर एक प्रकार का है, पशुओं का दूसरे प्रकार का। पक्षियों का शरीर अन्य है, तो मछलियों का भिन्न प्रकार का।

40स्वर्गीय देह हैं और पार्थिव देह भी हैं, परन्तु स्वर्गीय देह का तेज और है तो पार्थिव देह का और।

41सूर्य का तेज और है, चांद का तेज और, फिर तारों का तेज और है, वरन् एक तारे का तेज दूसरे से भिन्न है।

42मृतकों का जी उठना भी ऐसा ही है। नशवर देह बोई जाती है, अविनाशी देह जिलायी जाती है

43अनादर के साथ बोई जाती है और महिमा के साथ जिलाई जाती है, निर्बल दशा में बोई जाती है और सामर्थ्य में जिलाई जाती है,

44स्वाभाविक दशा में बोई जाती है और आत्मिक दशा में जिलाई जाती है। जबकि स्वाभाविक देह है तो आत्मिक दे भी है।

45इसलिए यह लिखा है, ‘‘पहला मनुष्य, आदम, जीवित प्राणी बना,’’ और अन्तिम आदम जीवनदायक आत्मा।

46अतः पहले आत्मिक नहीं वरन् स्वाभाविक था, और तब आत्मिक आया।

47पहला मनुष्य पृथ्वी से है अर्थात् पार्थिव, दूसरा मनुष्य स्वर्ग से है।

48जैसे वह पार्थिव है, वैसे ही वे भी हैं जो पार्थिव हैं, और जैसा वह स्वर्गीय है, वैसे ही वे भी हैं जो स्वर्गीय है।

49और जैसे हमने उस पार्थिव का रूप धारण किया है, वैसे ही उस स्वर्गीय का भी रूप धाारण करेंगे।

50हे भाइयो, मैं यह कहता हूं कि मांस और लहू परमेश्वर के राज्य के उत्तराधिकारी नहीं हो सकते, और न विनाश, अविनाशी का अधिकारी हो सकता है।

51देखो, मैं तुम्हें एक रहस्य की बात बताता हूँ: हम सब सोएंगे नहीं परन्तु सब के सब बदल जाएंगे।

52यह एक क्षण में, पलक मारते ही, अन्तिम तुरही के बजाए जाने के समय होेगा। क्योंकि तुरही बजेगी, मृतक अविनाशी दशा में जिलाए जाएंगे और हम बदल जाएंगे।

53क्योंकि इस नाशमान का अविनाशी को और मरणशील का अमरता को पहिनना अवश्य है

54परन्तु जब यह नाशमान, अविनाश को पहन लेगा और यह मरणशील अमरता को पहन लेगा, तो यह लिखा हुआ वचन पूरा हो जाएगाः ‘‘मृत्यु को विजय ने निगल लिया है।

55हे मृत्यु, तेरी विजय कहां है? हे मृत्यु, तेरा डंक कहां?’’

56मृत्यु का डंक तो पाप है, और पाप की शक्ति व्यवस्था है।

57परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो जो हमें प्रभु यीशु मसीह के द्वारा विजयी करता है।

58इसलिए हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो तथा प्रभु के कार्य में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि तुम जानते हो कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)